TDS Default Crackdown: मशीन लर्निंग से पकड़ में आए टैक्स डिफॉल्टर, आयकर विभाग प्रवर्तन मोड में

Maharashtra में आयकर विभाग की टीडीएस टीम ने टैक्स अनुपालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। पुणे समेत कई जिलों में टीडीएस काटकर जमा न करने वाले कटौतीकर्ताओं पर तकनीक आधारित कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
Pune Water Crisis Ambegaon Junnar Tanker
पुणे वॉटर क्राइसिस टैंकर सप्लाई (सौ. फाइल फोटो )
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Pune News In Hindi: महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में आयकर विभाग (आईटी) की टीडीएस टीम ने कर अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, पुणे स्थित आईटी विभाग की टीडीएस टीम उन कटौतीकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, जो भुगतान के समय कर तो काटते हैं, लेकिन उसे समय पर सरकारी खजाने में जमा नहीं करते।

वित्तीय आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाएगा

यह पहल सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) की देशव्यापी तकनीक-आधारित रणनीति का हिस्सा है। विभाग अब मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर टीडीएस रिटर्न, बैंक लेनदेन और वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) का विश्लेषण कर रहा है। इन टूल्स के जरिए टीडीएस की गैर-जमा या आंशिक जमा जैसी अनियमितताओं को आसानी से चिन्हित किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जागरूकता अभियार्नी के बाद अब विभाग पूरी तरह 'प्रवर्तन मोड' में आ चुका है। आयकर विभाग का यह अभियान केवल पुणे तक सीमित नहीं है।

सोलापुर, कोल्हापुर, और अहिल्या नगर जैसे जिलों में भी सत्यापन की कार्रवाई तेज कर दी गई है। कई मामलों में कर्मचारियों और वेडर्स ने टीडीएस क्रेडिट न मिलने की शिकायतें की थी। जांच में पाया गया कि कंपनियां टैक्स काटकर उसे दबाए बैठी थी। फील्ड अधिकारियों की सक्रियता के बाद कई डिफॉल्टरों को तत्काल बकाया राशि जमा करने और रिटर्न में सुधार करने पर 7 मजबूर होना पड़ा है।

आदतन डिफॉल्टरों पर होगी सख्ती

विभाग का संदेश स्पष्ट है कि टीडीएस कटौती के बाद वह 'सरकारी चन' बन जाता है, जिसका दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, कंपनियों, ट्रस्टों और सोसायटियों को सलाह दी गई है कि वे समय पर टीडीएस जमा करें और रिटर्न दाखिल करे, फॉर्म 26AS और AIS से नियमित मिलान करें, विभागीय नौटिसी का त्वरित उत्तर दे।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि तकनीकी त्रुटि का बहाना अब आदतन डिफॉल्टरों को राहत नहीं देगा, जानबूझकर की गई चूक पर ब्याज, भारी जुर्माना और अभियोजन जैसे सख्त कदम उठाए जाएंगे, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सख्ती ईमानदार करदाताओं के लिए वरदान है, जिनके रिफंड अवसर दूसरों की लापरवाही के कारण अटक जाते हैं।

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