
Footpath Encroachment Removal:भंडारा नगर परिषद (सोर्सः AI)
Bhandara Encroachment Drive: भंडारा नगर परिषद की ओर से एक बार फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस बार गांधी चौक से पोस्ट ऑफिस चौक, वहां से बस स्टैंड और आगे त्रिमूर्ति चौक तक सड़क पर किए गए अतिक्रमण हटाए गए। उल्लेखनीय है कि भंडारा नगर परिषद के पास स्थायी तोड़ू दस्ता नहीं है, इसके बावजूद इस तरह की कार्रवाई बार-बार सवालों के घेरे में आ जाती है।
नगर परिषद प्रशासन का कहना है कि 100 दिनों की विशेष कार्य योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है, जिसके तहत शहर को अतिक्रमण-मुक्त बनाना प्राथमिकता है। इसी क्रम में नगर परिषद द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले खात रोड पर भी अतिक्रमण हटाया गया था।
नगर परिषद की ओर से दुकानदारों को समय-समय पर स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की अपील की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाए जाने से शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में यातायात बाधित हो रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए 19 जनवरी को नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए 60 से 70 अतिक्रमणकारियों के अवैध ढांचों पर बुलडोजर चलाया।
यह कार्रवाई गांधी चौक से पोस्ट ऑफिस चौक, पोस्ट ऑफिस चौक से बस स्टैंड तथा बस स्टैंड से त्रिमूर्ति चौक तक के मार्ग पर की गई। अभियान के दौरान दुकानों के सामने बने बांस के अस्थायी ढांचे, टीन शेड और सीमेंट के चबूतरे हटाए गए। नगर परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
संभावना जताई जा रही है कि 20 जनवरी को राजीव गांधी चौक क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। दुकानदारों से अपील की गई है कि वे सार्वजनिक सड़कों पर दोबारा अतिक्रमण न करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरी कार्रवाई मुख्याधिकारी जुम्मा प्यारेवाले के मार्गदर्शन में की गई। इस दौरान पवन कनोजे, संकेत कोचे, मिथुन मेश्राम, सनी सोनेकर, पवन मोगरे, अंकुश हुमने, आकाश मेश्राम, सागर रगड़े, अरविंद गणवीर, चार फायरमैन, चांताराम तिबोडे सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे।
नगर परिषद द्वारा त्रिमूर्ति चौक से गांधी चौक तक चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान कहीं केवल दिखावा बनकर न रह जाए, यही नागरिकों की चिंता है। शहर के लगभग सभी प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण मौजूद है, लेकिन कार्रवाई अक्सर गरीब फेरीवालों तक ही सीमित रह जाती है।
अभियान के बाद दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती। खात रोड इसका उदाहरण है, जहां अगले ही दिन हालात फिर पहले जैसे हो गए। बड़े दुकानदारों, कोचिंग क्लासेस और नर्सिंग होम के अतिक्रमण पर प्रशासन की आंखें मूंदे जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। नागरिकों की मांग है कि अतिक्रमण हटे, लेकिन भेदभाव-रहित और स्थायी समाधान के साथ। हटाए गए दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, तभी शहर को वास्तव में अतिक्रमण-मुक्त बनाया जा सकेगा।






