9 गांवों की जीत, ग्रामीणों के विरोध के बाद टाकली हाजी की Health Officer का तबादला

Pune के शिरूर तहसील के टाकली हाजी प्राइमरी हेल्थ सेंटर की Health Officer Dr. Priyanka Ghuge का आखिरकार ट्रांसफर कर दिया गया है। 9 गांवों के लोगों के लगातार विरोध के बाद ये फैसला लिया गया है।
Pune के शिरूर तहसील के टाकली हाजी प्राइमरी हेल्थ सेंटर की Health Officer Dr। Priyanka Ghuge का आखिरकार ट्रांसफर कर दिया गया है। 9 गांवों के लोगों के लगातार विरोध के बाद ये फैसला लिया गया है।
टाकली हाजी प्राइमरी हेल्थ सेंटर (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: शिरूर तहसील के टाकली हाजी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डॉ। प्रियंका घुगे का आखिरकार अचानक तबादला कर दिया गया है। यह फैसला 9 गांवों के निवासियों के लगातार प्रयास की जीत है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ। रामचंद्र हंकारे ने तीसरी बार गठित की गई जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया है। इस फैसले से पिछले कई महीनों से अन्याय सह रहे नौ गांवों के निवासियों को बड़ी राहत मिली है। इस कारण सोमवार से होने वाला भूख हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता शंकर पिंगले और सरपंच अरुण घोडे ने दी।

तहसील के टाकली हाजी, फाकटे, वडनेर, जांबुत, पिंपरखेड, मालवाडी, काठापुर, सरदवाडी और चांडोह इन नौ गांवों के निवासियों ने कई महीनों से टाकली हाजी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डॉ प्रियंका घुगे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं।

इसमें ग्रामीणों ने आरोप गया था कि मेडिकल ऑफिसर के केंद्र में स्थायी रूप से न रहने के कारण, खासकर रात के समय में, ग्रामीणों को इलाज नहीं मिल पाता था। गंभीर मरीजों को जान जोखिम में डालकर शिरूर की ओर भागना पड़ता था।ग्रामीणों के अथक प्रयास के बाद ही डॉ। घुगे का तबादला हो सका।

समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए पर्याप्त साक्ष्य

ग्रामीणों की शिकायत के बाद पहली जांच समिति ने झूठा और पक्षपाती अहवाल (रिपोर्ट) तैयार किया था। इस मामले में तहसील मेडिकल ऑफिसर डॉ। राजेश कट्टीमनी ने खुद यह स्वीकार किया था कि वरिष्ठों के दबाव के कारण उन्हें झूठी रिपोर्ट देनी पड़ी। दूसरी बार भी वही समिति भेजे जाने पर ग्रामीणों ने विरोध किया और उन्हें वापस लौटा दिया।

इस बार सरपंच अरुणा घोडे और ग्रामीणों ने ठोस सबूत जैसे कि दवाओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, गैर-हाजिरी के प्रमाण और गवाहों के बयान पेश किए। प्रशासन ने तबादले का यह निर्णय अत्यधिक जल्दबाजी में लिया, क्योंकि नौ गांवों के निवासियों ने सोमवार से भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी थी।

प्रशासन यह जानता था कि अगर अनशन शुरू होता, तो यह मामला और भी अधिक गंभीर हो सकता था और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी। इसलिए, स्थिति को खराब होने से रोकने और जन आक्रोश को शांत करने के उद्देश्य से, प्रशासन ने आनन-फानन में यह कार्रवाई की और तबादले की घोषणा कर दी।

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