Ramdara Temple News: तीर्थयात्रियों पर मंडरा रहा मौत का साया, कभी भी ढह सकता है 60 साल पुराना पुल

Pune District के लोणी कालभोर में स्थित तीर्थस्थल रामदरा को जाने वाले रास्ते पर बना पुल खस्ताहाल में है। जिसको लेकर स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है।
Ramdara Temple
रामदरा मंदिर (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: पुणे जिले के लोणी कालभोर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल रामदरा को जाने वाले मार्ग पर स्थित एक 60 साल पुराना पुल अपनी जर्जर हालत के कारण बड़े खतरे का संकेत दे रहा है। यह पुल, जो कि नई मुला दाहिनी नहर पर बना है, कभी भी ढह सकता है और एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सरकार और संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं। 1965 में बना यह पुल अब अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पर है। पुल की बुनियाद कमजोर हो चुकी है, और इसकी संरचना में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। पुल पर लगी लोहे की रेलिंग भी टूट चुकी है।

पुल का निर्माण कार्य बेहद खराब हो चुका है। इस पुल का इस्तेमाल सिर्फ तीर्थयात्री ही नहीं, बल्कि लोणी कालभोर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाली कई बस्तियों जैसे कोलपे बस्ती, ढाले बस्ती के लोग भी करते हैं। फुरसुंगी रेलवे स्टेशन और आसपास के खेतों तक जाने के लिए भी यह एकमात्र मार्ग है। रामदरा तीर्थस्थल पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण आसपास के इलाके की हरियाली बढ़ गई है।

प्रशासन की कुंभकर्णी नींद

इतने गंभीर खतरे के बावजूद, जल संसाधन विभाग और अन्य सरकारी विभाग इस मामले पर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। स्थानीय निवासियों और ग्राम पंचायत ने कई बार खडकवासला सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को ज्ञापन दिया है, जिसमें एक नया पुल बनाने की मांग की गई है। लेकिन, अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि क्या सरकार किसी मावल तालुका के कुंडमला जैसी दुर्घटना का इंतजार कर रही है, जहां एक पुल गिरने से कई लोगों की जान चली गई थी? क्या प्रशासन तभी जागेगा जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा? यह सवाल आज हर स्थानीय नागरिक की जुबान पर है।

तत्काल समाधान की है आवश्यकता

इस स्थान पर एक मजबूत पुल बनाना अनिवार्य है, जो भारी वाहनों का बोझ झेल सके। जब तक नया पुल नहीं बनता, तब तक पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना चाहिए, जनप्रतिनिधियों की मांग है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लें और संभावित दुर्घटना से पहले ही आवश्यक कदम उठाए। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह लापरवाही कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।

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