Parth Pawar Clean Chit in Pune Land Scam
Pune Land Scam: महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहने वाले पवार परिवार के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पुणे के मुंढवा इलाके में हुए करोड़ों रुपये के कथित सरकारी जमीन घोटाले में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को क्लीन चिट मिल गई है। पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई 1,886 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट में पार्थ पवार का नाम बतौर आरोपी शामिल नहीं किया गया है। इस विकासक्रम ने पिछले काफी समय से चल रही राजनीतिक बयानबाजी और अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
यह मामला मुंढवा स्थित लगभग 40 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़ा है। पुलिस की जांच में यह पाया गया कि जिस जमीन का सौदा किया गया, वह वास्तव में महाराष्ट्र सरकार की थी। आरोप है कि कुछ निजी संस्थाओं और सरकारी अधिकारियों ने मिलीभगत कर इस सरकारी संपत्ति को निजी दर्शाया और इसका हस्तांतरण किया। इस मामले में ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ नामक कंपनी रडार पर थी, जिसमें पार्थ पवार एक पार्टनर के रूप में जुड़े हुए थे।
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चार्जशीट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यद्यपि पार्थ पवार ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ में एक भागीदार (Partner) हैं, लेकिन इस विवादित जमीन सौदे में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका या सक्रिय संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं। ईओडब्ल्यू ने अपनी प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें इस मामले में आरोपी नहीं बनाया है। पुलिस के अनुसार, पार्थ कंपनी के व्यावसायिक संचालन में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इस विशिष्ट भूमि सौदे के दस्तावेजों या साज़िश में उनकी भागीदारी साबित करने वाले साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।
भले ही पार्थ पवार को राहत मिल गई हो, लेकिन चार्जशीट में कई अन्य रसूखदार नामों को आरोपी बनाया गया है। इसमें शीतल तेजवानी (44) का नाम प्रमुख है, जिनके पास जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) थी। उन पर आरोप है कि सरकारी जमीन होने की जानकारी के बावजूद उन्होंने इसकी बिक्री की। इनके अलावा, अमाडिया एंटरप्राइजेज के एक अन्य पार्टनर दिग्विजय अमरसिंह पाटिल और निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले का नाम भी चार्जशीट में दर्ज है। इन पर सरकारी रिकॉर्ड के साथ हेरफेर करने और अवैध सौदे को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है।
पुणे पुलिस के सूत्रों का कहना है कि यह जांच का केवल एक चरण है और मामला अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। आर्थिक अपराध शाखा अभी भी दस्तावेजों और इस सौदे में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यदि भविष्य में नए तथ्य या साक्ष्य सामने आते हैं, तो एक ‘सप्लीमेंट्री चार्जशीट’ (पूरक आरोप पत्र) भी दाखिल की जा सकती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दिए गए उच्च स्तरीय जांच के निर्देशों के बाद प्रशासन इस मामले में किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।