
शिव परिवार (सौ.सोशल मीडिया)
Mahashivratri Kab Hai 2026 : शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारियां शुरु हो गई हैं। यह हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महापर्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का उत्सव मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर व्रत, रात्रि जागरण और विधि-विधान से की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शिव कृपा प्राप्त होती है।
ज्योतिषयों के अनुसार, इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग में मनाया जाएगा। फाल्गुन मास की शिवरात्रि आध्यात्मिक उन्नति, मनोकामना पूर्ति और शिव कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस विशेष योग में विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव आते हैं।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन माह की महाशिवरात्रि का पर्व विशेष संयोग में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे इसका समापन होगा।
ऐसे में व्रत और रात्रि जागरण 15 फरवरी की रात्रि में किया जाएगा। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति मानी जाती है।
इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे अत्यंत दुर्लभ संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्रवण नक्षत्र को ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है, वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए पूजा-पाठ और व्रत शीघ्र फलदायी होते हैं।
इस विशेष योग में भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने की मान्यता है।
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पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के पावन दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। कहा जाता है कि कठोर तपस्या और अखंड साधना के पश्चात माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। इसी कारण यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन, प्रेम, तप और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिव आराधना करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
ओम नमः शिवाय
. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
. ॐ हौं जुं स: मृत्युंजयाय नम:॥
. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥






