Bullet Train Project: पालघर की पहाड़ियों में बुलेट ट्रेन का काम तेज, एक महीने में दूसरा माउंटेन टनल ब्रेकथ्रू

Mumbai Ahmedabad Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। पालघर में माउंटेन टनल-6 का सफल ब्रेकथ्रू हुआ। इससे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण में तेजी आई है।
Mumbai Ahmedabad Bullet Train Tunnel Breakthrough
महाराष्ट्र के पालघर जिले में दूसरी माउंटेन टनल (MT-6) के बनी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Palghar Bullet Train Tunnel Construction: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना ने महाराष्ट्र सेक्शन में एक और अहम मुकाम हासिल कर लिया है। पालघर जिले में मंगलवार को माउंटेन टनल 6 का सफल ब्रेकथ्रू हुआ। खास बात यह रही कि यह एक महीने के भीतर दूसरा माउंटेन टनल ब्रेकथ्रू है, जिससे बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी साफ दिखाई दे रही है। यह अब तक पूरे कॉरिडोर का तीसरा टनल ब्रेकथ्रू है। करीब 11.30 बजे हुए इस ब्रेकथ्रू कार्यक्रम में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और पालघर के सांसद हेमंत सावरा वर्चुअली जुड़े।

टनल का काम आगे बढ़ने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का 60-70% प्रतिशत पार्ट भारत पहुंच चुका है और बचा हुआ अभी भी चीन में अटका हुआ है। पालघर जिले में हुए टनल 6 की लंबाई 454 मीटर और चौड़ाई 14.4 मीटर है, जिसे अप और डाउन दोनों हाई-स्पीड ट्रैक्स के लिए डिजाइन किया गया है।

चुनौतीपूर्ण कार्य एक साथ आगे बढ़ रहे

इससे पहले 2 जनवरी 2026 को सफाले के पास माउंटेन टनल-5 का ब्रेकथ्रू हुआ था, जबकि पहला टनल सितंबर 2025 में नवी मुंबई के घनसौली में पूरा किया गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सेक्शन में हालिया प्रगति परियोजना की मजबूत गति को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि टनल, पुल और स्टेशन जैसे कई चुनौतीपूर्ण कार्य एक साथ आगे बढ़ रहे है। माउंटेन टनल 6 का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से किया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एक ही महीने के भीतर दूसरी माउंटेन टनल का ब्रेकयू अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। पिछले कई वर्षों से उद्धव ठाकरे सरकार के दौरान रुके हुए प्रोजेक्ट्स अब राज्य में तेजी से पूरे किए जा रहे है। अगले वर्ष बुलेट ट्रेन का पहला चरण बिलिमोरा से सूरत के बीच शुरू किया जाएगा।

क्रॉसिंग पर भी कार्य प्रगति पर

इस तकनीक में ड्रिल और नियंत्रित ब्लास्ट के जरिए खुदाई होती है, जो जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। टनल की खुदाई दोनों सिरों से एक साथ की गई और इसे 12 महीनों में पूरा किया गया, न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड के तहत शॉटक्रीट, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर्स के माध्यम से रियल-टाइम सपोर्ट दिया जाता है, जिससे भारी टनल बोरिंग मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती। परियोजना अधिकारियों ने बताया कि खुदाई के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। लगातार जियोटेक्निकल मॉनिटरिंग, रियल-टाइम इंस्ट्रूमेंटेशन, फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और नियंत्रित एक्सेस जैसे इंतजाम किए गए थे।

महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना कई मोर्चों पर आगे बढ़ रही है। वैतरणा नदी पर बनने वाला सबसे लंबा नदी पुल पियर निर्माण चरण में पहुंच चुका है, जबकि उल्हास और जगणी नदियों पर फाउंडेशन का काम जारी है। राज्य में प्रस्तावित चारों स्टेशनों और प्रमुख राष्ट्रीय-राज्य राजमार्ग क्रॉसिंग पर भी निर्माण कार्य प्रगति पर है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स से शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत सेक्शन पर खुदाई जारी है।

- नवभारत लाइव के लिए मुंबई से अभिषेक पाठक की रिपोर्ट

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