सरकारी टेंबा हॉस्पिटल में लापरवाही,गंभीर मरीज को नहीं मिला समय पर इलाज
Temba Hospital: गंभीर स्थिति के बावजूद अस्पताल प्रशासन और एंबुलेंस सेवा की लापरवाही सामने आई, जिसके चलते परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
- Written By: आंचल लोखंडे
सरकारी टेंबा हॉस्पिटल में लापरवाही (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Thane News: दिव्यागों के लिए कार्य करने वाली संस्था भावना फाउंडेशन ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता और दिव्यांग समाजसेवी प्रमोद शर्मा की तबीयत सोमवार देर रात अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तुरंत डॉ. भीमसेन जोशी (टेंबा) अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद अस्पताल प्रशासन और एंबुलेंस सेवा की लापरवाही सामने आई, जिसके चलते परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
संस्था की अध्यक्षा भावना तिवाड़ी ने बताया कि रात करीब 3।30 बजे इमरजेंसी में मरीज को नायर अस्पताल रेफर करने के लिए कहा गया। परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क साधा, लेकिन कॉल रिसीव होने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। दूसरी बार कॉल करने पर लाइन व्यस्त बताई गई। मजबूरी में परिजनों ने महानगरपालिका के एंबुलेंस चालक जुबेर खान को फोन किया, लेकिन चालक ने यह कहकर कॉल काट दिया कि उसकी ड्यूटी सुबह 7 बजे से शुरू होती है।
एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं हुई उपलब्ध
गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों ने डॉक्टर से ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन डॉक्टर ने यह कहकर मना कर दिया कि अस्पताल में सिर्फ एक सिलेंडर है और किसी अन्य मरीज को जरूरत पड़ सकती है। इतना ही नहीं, मरीज की सही जांच किए बिना ही डॉक्टरों ने परिजनों को कैंसर, टीबी या चेस्ट इंफेक्शन जैसी आशंकाएं बताकर डराया और प्राइवेट एंबुलेंस बुलाने की सलाह दी।
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मरीज को रेफर करने की मजबूरी
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ICU बेड और ऑक्सीजन की सुविधा मौजूद होने के बावजूद भी मरीज को नायर अस्पताल रेफर किया गया। मजबूरी में परिवार ने प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लिया, जहां उनसे मनमाना किराया वसूला गया।इस संबंध में जब अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ ।जफर तड़वी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। सवाल यह उठता है कि जब अस्पताल में सुविधाएं मौजूद थीं, तो मरीज को रेफर करने की मजबूरी क्यों बनी?
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अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मामला अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। अगर समय पर ऑक्सीजन और ICU की सुविधा दी जाती तो मरीज को प्राइवेट एंबुलेंस पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और उसकी जान को खतरा कम होता। भावना फाउंडेशन ट्रस्ट ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि टेंबा अस्पताल प्रशासन की लापरवाही आम मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
