अब 'अशफाक उल्ला खान' के नाम से जाना जाएगा टीपू सुल्तान चौक, पोटो- सोशल मीडिया
Mira Bhayandar Municipal Corporation: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में टीपू सुल्तान के नाम को लेकर चल रहे लंबे सियासी विवाद के बीच एक बड़ा फैसला लिया गया है। मीरा-भाईंदर नगर निगम ने नया नगर स्थित विवादित ‘हजरत टीपू सुल्तान चौक’ का नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। अब इस चौक को देश के महान क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान के नाम से जाना जाएगा।
मीरा रोड के नया नगर इलाके में स्थित इस चौक का नाम बदलने की मांग नवनिर्वाचित बीजेपी पार्षदों द्वारा लगातार की जा रही थी। बुधवार को सदन की कार्यवाही के दौरान बीजेपी द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई और इसे बहुमत से मंजूरी मिल गई।
रोचक बात यह रही कि इस मुद्दे पर कड़ा विरोध कर रही कांग्रेस ने भी अंततः ‘यू-टर्न’ ले लिया। हालांकि, कांग्रेस ने सुझाव दिया था कि इस चौक का नाम बदलकर ‘अब्दुल गफ्फार खान’ के नाम पर रखा जाए, लेकिन सदन में बीजेपी का बहुमत होने के कारण अशफाक उल्ला खान के नाम पर मुहर लगी।
महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान को लेकर विवाद की चिंगारी नासिक के मालेगांव नगर निगम से सुलगी थी। वहां समाजवादी पार्टी की नेता और डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद ने अपने सरकारी दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई थी, जिस पर प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल तब पूरी तरह गरमा गया जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी।
कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान को सत्ताधारी बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने महाराष्ट्र की अस्मिता और शिवाजी महाराज का घोर अपमान बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे महापुरुषों का अपमान करार दिया। चौतरफा घेराबंदी के बाद हर्षवर्धन सपकाल ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उन्होंने सफाई दी कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और उन्होंने केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में टीपू सुल्तान का उदाहरण दिया था, जिसे बीजेपी ने गलत तरीके से प्रसारित किया।
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विवादों को पीछे छोड़ते हुए अब प्रशासन ने इस चौक को एक ऐसे नायक का नाम दिया है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू-मुस्लिम एकता और अटूट वीरता के प्रतीक माने जाते हैं। बीजेपी नेताओं का मानना है कि टीपू सुल्तान के नाम पर हो रही राजनीति को खत्म करने और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करने के लिए अशफाक उल्ला खान का नाम सबसे उपयुक्त है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महापुरुषों और ऐतिहासिक पहचान को लेकर सियासत अपने चरम पर है।