MBMC general body meeting (सोर्सः सोशल मीडिया)
MBMC General Body Meeting: प्रशासनिक राज की समाप्ति के बाद सत्ता का जनादेश लेकर लौटी मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) की पहली ही आमसभा राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। बुधवार को हुई इस बैठक में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। नतीजा यह हुआ कि विपक्ष के पार्षद जमीन पर बैठकर विरोध दर्ज कराते रहे।
विपक्षी पार्षदों कांग्रेस और शिवसेना का आरोप है कि सदन में महापौर के आसन के सामने उन्हें बैठने की जगह नहीं दी गई। उनके लिए एक कोने में दो-दो की जोड़ियों में कुर्सियों पर स्थान तय किया गया और यहां तक कि किस पार्षद को किस कुर्सी पर बैठना है, इसके लिए नाम-पट्टिकाएँ भी लगा दी गईं।
विपक्ष ने इसे “राजनीतिक अपमान” बताते हुए कहा कि सदन में उनकी गरिमा को जानबूझकर ठेस पहुंचाई गई। विरोध स्वरूप सभी 16 विपक्षी पार्षद पूरे सत्र के दौरान जमीन पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि उन्हें आगे की दोनों पंक्तियों में एक साथ बैठने की व्यवस्था की जाए, जबकि दो-दो की जोड़ी में बैठाना उचित नहीं है। हालांकि बाद में महापौर द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद विपक्ष के पार्षदों ने अपना आसन ग्रहण कर लिया।
सदन में सत्तारूढ़ भाजपा के 79 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन के 16 पार्षद विपक्ष में हैं। विपक्ष का आरोप है कि बहुमत के बल पर सत्ता पक्ष मनमानी कर रहा है और लोकतांत्रिक परंपराओं को दरकिनार किया जा रहा है।
गट नेता (कांग्रेस, शिवसेना) जय ठाकुर ने कहा कि महानगरपालिका, विधानसभा और संसद में विपक्ष को पीठासीन अधिकारी के सामने बैठने की व्यवस्था दी जाती है, लेकिन मीरा-भाईंदर में बहुमत के दम पर भाजपा तानाशाही की शुरुआत कर रही है। महापौर ने आश्वासन दिया है कि अगली आमसभा से पहले व्यवस्था सुधारी जाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम आगे भी जमीन पर बैठकर ही विरोध दर्ज कराएंगे। यह केवल कुर्सी का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और सम्मान का प्रश्न है
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विपक्ष ने खुद महापौर और उन्हें चुनकर सदन में भेजने वाली जनता का अपमान किया है। उन्हें बार-बार कुर्सी पर बैठने का अनुरोध किया गया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। यह सब राजनीतिक नौटंकी है। सदन में बैठने की व्यवस्था प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत की गई थी और इसमें किसी प्रकार का अपमान करने का उद्देश्य नहीं था – हसमुख गहलोत, गट नेता (भाजपा)।
पहली ही आमसभा में गरमाए माहौल ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में सदन की कार्यवाही तल्ख राजनीतिक बहसों से भरी रहने वाली है। जहां भाजपा बहुमत के सहारे मजबूत स्थिति में है, वहीं विपक्ष खुद को “लोकतंत्र की आवाज” के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है। अब नजर अगली आमसभा पर टिकी है। मीरा-भाईंदर की राजनीति में यह टकराव केवल शुरुआत है या आने वाले बड़े संघर्ष की प्रस्तावना यह वक्त तय करेगा।