त्र्यंबकेश्वर में मांस-मछली की दुकानों पर कार्रवाई, सार्वजनिक स्थानों से हटाई गई 11 दुकानें

Trimbakeshwar Meat Shops: त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेला व संत निवृत्तिनाथ यात्रा को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर चल रही 11 मांस, चिकन व मछली दुकानों को नगरपालिका ने स्थानांतरित कर दिया।
Action taken against meat and fish shops in Trimbakeshwar; 11 shops removed from public places.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Kumbh Mela Preparation Municipal Action: त्र्यंबकेश्वर शहर में सार्वजनिक स्थानों पर मांस, मछली बेचने वाले नगरपालिका ने दुकानें बंद करवा दीं। त्रिंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेला और संत निवृत्तिनाथ यात्रा को ध्यान में रखते हुए, सड़क पर दिखाई देने वाली 11 मटन, मांस, चिकन और मछली विक्रेताओं की दुकानों को स्थानांतरित कर दिया गया।

ये दुकानें त्रिंबक में घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित थीं और दिखाई देती थीं। साधु महंत ने इन दुकानों के दिखाई देने की शिकायत की थी और वारकरी समुदाय ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त की थी। यह कार्रवाई हाल ही में हुई यात्रा को ध्यान में रखते हुए की गई।

दुकान न लगाने की मनपा प्रशासन ने दी चेतावनी

प्रांतीय अधिकारी पथन दत्ता, तहसीलदार गणेश जाधव, नगर प्रशासनिक अधिकारी जाधव सोनार सोनावाने और कर्मचारी गायकवाड़ गंगापुत्र समेत पुलिस की मौजूदगी में इन दुकानों को हटाया गया। इस कार्य में जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। पेगलवाड़ी फाटा गणपत बारी और आस-पास दिखाई देने वाली अन्य दुकानें हटा दी गई। उन्हें त्रंबकेश्वर में दुकानें न लगाने के लिए कहा गया। विक्रेताओं से लकड़ी के ब्लॉक और मुर्गी के जाल जब्त कर लिए गए। इस बीच, नगरपालिका से ऐसे विक्रेताओं के पुनर्वास के लिए एक विशिष्ट स्थान उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है, क्योंकि इन्ही विक्रेताओं की आजीविका इसी स्थान पर निर्भर है। व्यापारियों ने अब तक हुए नुकसान पर नाराजगी व्यक्त की है।

सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम बिक्री

त्रंबकेश्वर में पिछले कई सालों से खुली सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम अवैध तरीके से मांस की बिक्री की जा रही थी, इस बारे में साधु संतों का कहना था कि त्रंबकेश्वर एक धार्मिक नगरी है और कुछ समय बाद नाशिक में कुंभ मेले की शुरआत हो रही है इसलिए यहां दूर दराज से बड़ी संख्या में भक्तगण आएंगे इसलिए खुली जगहों पर मांस की बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद की जाए।

साधु संतों ने यह तर्क भी दिया था कि किसी भी धार्मिक स्थलों पर मांस की बिक्री नहीं की जाती है इसलिए यहां पर भी रोक लगाई जाए इस मांग के बाद स्थानीय प्रशासन ने यह कार्रवाई की।

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