सिंहस्थ कुंभ 2027: नासिक को नई पहचान देने की दूरगामी योजना, आयुक्त शेखर सिंह ने साझा किया विज़न

Kumbh 2027: प्राचीन विरासत और गोदावरी तटों के लिए प्रसिद्ध नासिक को महाराष्ट्र की ‘आध्यात्मिक राजधानी’ बनाने की तैयारी है। कुंभ 2027 को लेकर विकास प्राधिकरण ने अपना विज़न साझा किया।
Simhastha Kumbh 2027: A long-term plan to give Nashik a new identity; Commissioner Shekhar Singh shares his vision
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Kumbh Development Authority: नासिक अपनी प्राचीन विरासत, पौराणिक मंदिरों और गोदावरी के पवित्र तटों के लिए विख्यात नासिक नगरी को अब महाराष्ट्र की 'आध्यात्मिक राजधानी' के रूप में नई पहचान मिलने जा रही है।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेला विकास प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने शहर के शिक्षा, साहित्य और कला क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बैठक कर आगामी सिंहस्थ कुंभ 2027 के लिए अपनी दूरगामी योजनाओं को साझा किया।

श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड आंकड़ा और तैयारियां

आगामी कुंभ मेला पिछले आयोजनों की तुलना में कहीं अधिक विशाल होने वाला है- 2015 के कुंभ में लगभग 2.5 करोड़ लोग आए थे।

शैक्षणिक सत्र में बदलाव पर मंथन

लेकिन इस बार नासिक में 8 करोड़ और त्र्यंबकेश्वर में 4 करोड़ भक्तों के आने का अनुमान है। प्रयागराज कुंभ की तर्ज पर आधुनिक सुख-सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

शहर के भीतर यातायात और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। आयुक्त ने कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे निबंध लेखन, कार्यशालाओं और साहित्य प्रदर्शनियों के माध्यम से कुंभ के सांस्कृतिक महत्व को लोगों तक पहुँचाएं।

कुंभ मेले के दौरान होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन एक अनोखे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है- वर्ष 2027 में मुख्य पर्व (जुलाई से सितंबर) के दौरान ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए शैक्षणिक सत्र को सितंबर के बाद शुरू करने की संभावना तलाशी जा रही है।

सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता पर जोर

  • हालांकि कई शिक्षण संस्थाओं ने इस पर आपत्ति जताई है, लेकिन आयुक्त शेखर सिंह ने आश्वासन दिया है कि विश्वविद्यालय से आवश्यक अनुमतियां और कानूनी प्रक्रिया की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
  • बैठक में डॉ. गोविंद कतलाकुटे, साहित्यिक नरेश महाजन, एड। नितिन ठाकरे और सुनील जगताप जैसे गणमान्य लोग उपस्थित थे।
  • आयुक्त ने सुझाव दिया कि कुंभ मेले को केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखकर उसे पर्यावरण संरक्षण, गोदावरी स्वच्छता और सामाजिक समरसता के मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, कॉलेजों के स्नेह सम्मेलनों में भी 'कुंभ थीम' को जोड़ने का आग्रह किया गया है।
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