राहुल गांधी असफल वंशवादी, उन पर कांग्रेस नेताओं को भी भरोसा नहीं, भाजपा नेता ने बोला हमला

Rahul Gandhi News : भाजपा नेता पूनावाला ने कहा कि राहुल के पास न जनमत है, न संगत। राहुल असफल विशेषाधिकार प्राप्त वंशवादी हैं। यह भी कहा कि राहुल पर कांग्रेस नेताओं को भी भरोसा नहीं है।
Rahul Gandhi is a failed dynast, even Congress leaders do not trust him
राहुल गांधी। इमेज-सोशल मीडिया
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BJP Attacks On Rahul Gandhi : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें एक असफल वंशवादी करार दिया है। भाजपा का यह हमला उस वक्त आया है, जब कांग्रेस के भीतर और उसके सहयोगी दलों के बीच नेतृत्व को लेकर दरारें चौड़ी होती नजर आ रही हैं। असम कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे और मणिशंकर अय्यर के हालिया बयानों ने भाजपा को राहुल गांधी की घेराबंदी करने का बड़ा मौका दे दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोर्चा संभालते हुए लिखा कि राहुल गांधी अपनी साख खो चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया कि न तो उनकी अपनी पार्टी के नेताओं को उन पर भरोसा है और न उनके गठबंधन सहयोगियों को। पूनावाला ने कहा कि एक तरफ तृणमूल कांग्रेस 'राहुल हटाओ, ममता लाओ' के नारे लगा रही तो दूसरी तरफ असम में भूपेन बोरा ने पार्टी नेतृत्व पर नजरअंदाज करने का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी की विफलता को समझने के लिए इससे बड़े सबूतों की जरूरत है?

मणिशंकर अय्यर के बयान से मची खलबली

विवाद तब और गहरा गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने भविष्यवाणी कर दी कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (वामपंथी नेता) अपनी सत्ता बरकरार रखेंगे। इस बयान ने कांग्रेस को असहज कर दिया है, क्योंकि केरल में कांग्रेस और वामपंथी दल एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। वैसे, कांग्रेस ने तुरंत पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अय्यर का पार्टी से कोई औपचारिक संबंध नहीं है और वे निजी तौर पर लिखते-बोलते हैं।

राजनीतिक रूप से नकार दिए गए हैं राहुल

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि अब कांग्रेस के कट्टर वफादार भी उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि चाहे मणिशंकर अय्यर हों, ममता बनर्जी हों या भूपेन बोरा ने यह संकेत दे दिया है कि राहुल के पास न तो जनमत है और न ही सहयोगियों का साथ। भंडारी ने कहा कि जिन लोगों ने पूरी जिंदगी कांग्रेस को दी, वे अब खुलेआम राहुल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। कुल मिलाकर असम में नेतृत्व परिवर्तन और केरल को लेकर घर के भीतर से उठी आवाजों ने राहुल गांधी की राजनीतिक राह को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

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