rural development fund Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Development News: स्मार्ट सिटी और बड़े विकास कार्यों के दावों पर नासिक महानगरपालिका की महासभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नगरसेवकों ने ही सवाल उठाते हुए विकास के दावों की पोल खोल दी। मनपा में शामिल 24 गांवों की बदहाल स्थिति और मूलभूत समस्याओं को लेकर सभागृह में गंभीर चर्चा हुई, जिसमें नगरसेवकों ने तीव्र नाराजगी जताई। अंततः इन गांवों के लिए महानगरपालिका बजट से अतिरिक्त निधि देने की घोषणा महापौर हिमगौरी आडके-आहेर ने की।
नगरसेवकों ने 2012 से बंद पड़े ग्रामीण विकास निधि को फिर से शुरू करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई। साथ ही इन गांवों के विकास के लिए राज्य सरकार से विशेष निधि की मांग मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखने की बात महापौर ने कही।
गौरतलब है कि 1982 में मनपा की स्थापना के समय नासिक, सातपुर, नासिक रोड नगरपालिकाओं और 24 गांवों को एक साथ शामिल किया गया था। इन गांवों के विकास के लिए अलग निधि की व्यवस्था थी, जिसे 2012 में बंद कर दिया गया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए दिनकर पाटील ने कहा कि शामिल गांवों का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। उपमहापौर विलास शिंदे ने बताया कि इन क्षेत्रों के नागरिक सबसे अधिक कर भरते हैं, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसके बाद कई नगरसेवकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं सामने रखीं।
पानी आपूर्ति की कमी
नागरिक सुविधाओं का अभाव
एक नगरसेवक ने यह भी कहा कि जिला परिषद क्षेत्र के गांवों में सीमेंट सड़कें हैं, जबकि मनपा क्षेत्र की सड़कों की हालत खराब है।
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ग्रामीण विकास निधि के मुद्दे पर महासभा काफी गरमा गई। अधिकतर नगरसेवक बोलने के लिए खड़े हो गए, जिसके चलते महापौर को सभा समेटनी पड़ी। इसके बाद कुछ नगरसेवकों ने हंगामा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की।
एक ओर स्मार्ट सिटी परियोजना और कुंभ मेला के लिए करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मनपा में शामिल 24 गांव 44 वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। महासभा में यह विरोधाभास खुलकर सामने आया।