
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
Municipal Election Mayor Race: नासिक मनपा के महापौर पद का आरक्षण ‘महिला सामान्य वर्ग’ के लिए घोषित होते ही नासिक की राजनीति का पारा चढ़ गया है। इस घोषणा के साथ ही सबसे अधिक पार्षदों वाली भारतीय जनता पार्टी में पद को लेकर जबरदस्त खींचतान और लॉबिंग शुरू हो गई है। हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मुहर लगे बिना किसी नाम पर अंतिम निर्णय होना संभव नहीं है, फिर भी दावेदारों ने अपने-अपने स्तर पर शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने से पुरुष वर्ग के उन कद्दावर नेताओं को बड़ा झटका लगा है, जो इस कुर्सी की आस लगाए बैठे थे। शिवसेना (ठाकरे गुट) से आए सुधाकर बडगुजर और मनसे से भाजपा में शामिल हुए दिनकर पाटिल जैसे कद्दावर नेताओं की उम्मीदों पर इस आरक्षण ने पानी फेर दिया है। कई वरिष्ठ पुरुष पार्षदों में इस आरक्षण के कारण गहरी निराशा देखी जा रही है।
मनपा की 122 सीटों में से भाजपा के पास 72 पार्षदों का स्पष्ट बहमत है, इसलिए महापौर भाजपा का ही बनना तय है। चर्चाओं के बाजार में ये नाम सबसे आगे चल रहे हैं- हिमगौरी आडके-आहेर, स्वाती भामरे, दिपाली गिते, श्वेता निर्मल भंडारी। डॉ। योगिता अपूर्व हिरे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी किसी ‘सरप्राइज’ नाम की घोषणा करके सबको चौंका भी सकती है।
नासिक महानगरपालिका में भाजपा 66 को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है। भाजपा की ओर से 16 महिला पार्षद निर्वाचित हुई है। महापौर पद को लेकर अंतिम निर्णय भाजपा की कौर कमेटी द्वारा लिया जाएगा। आगामी दो दिनों में महापौर पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी। भाजपा हमेशा नए चेहरों को अवसर देती है और नासिक में भी यही देखने को मिलेगा।
– सुनील केदार, भाजपा शहर अध्यक्ष
मंत्री महाजन ने यह भी संकेत दिए हैं कि अन्य दलों के कई पार्षद अभी भी भाजपा के संपर्क में है और पार्टी प्रवेश की प्रक्रिया जारी है। यदि अन्य दलों के पार्षद भाजपा में आते है, तो सदन में भाजपा का आंकड़ा और भी मजबूत हो जाएगा। फिलहाल वरिष्ठ नेताओं के बीच मथन का दौर जारी है।
नासिक के पालकमंत्री और कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने महापौर चयन को लेकर पार्टी की भूमिका स्पष्ट कर दी है। आगामी कुंभ मेले को देखते हुए नासिक को एक ऐसा महापौर चाहिए जो प्रशासनिक रूप से शिक्षित और विकास कार्यों को गति देने में सक्षम हो।
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महाजन ने दो टूक कहा है कि चाहे कोई कितना भी प्रयास कर ले, पार्टी के कड़े मापदंडों पर खरा उतरने वाला व्यक्ति ही मेयर बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए फिलहाल शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता में शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पिछली पंचवर्षीय योजना के दौरान यह पद एसटी महिला वर्ग के लिए आरक्षित था, तब रंजना भानसी को अवसर मिला था। इस बार ‘सामान्य महिला’ आरक्षण होने के कारण प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी है क्योंकि अब पार्टी की सभी महिला पार्षद इस दौड़ में शामिल हो गई हैं।






