देवलाली स्टेशन उपेक्षित, 22 से घटकर सिर्फ 7 ट्रेनें; रेलवे की बेरुखी से देवलाली की रफ्तार थमी

Nashik Rail Issue: नासिक का ऐतिहासिक देवलाली रेलवे स्टेशन कभी 22 ट्रेनों से गुलजार था, लेकिन कोरोना के बाद अब यहां सिर्फ 7 ट्रेनें ही रुक रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।
Deolali station neglected, train services reduced from 22 to just 7; railway's indifference has stalled Deolali's progress.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Deolali Railway Station Hindi News: नासिक भारतीय रेलवे जहां पूरे देश को जोड़ने का दम भरती है, वहीं नासिक का महत्वपूर्ण देवलाली रेलवे स्टेशन प्रशासन की बेरुखी का शिकार हो गया है। देश के गौरवशाली सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में से एक होने के बावजूद, यहां ट्रेनों की संख्या नाममात्र रह गई है।

जो स्टेशन कभी 22 एक्सप्रेस ट्रेनों की गूंज से गुलजार रहता था, वह कोरोना काल के बाद से केवल 7 ट्रेनों पर सिमट गया है। इससे न केवल स्थानीय नागरिक, बल्कि सीमा की रक्षा के लिए तैयार होने वाले जवान भी भारी परेशानी झेल रहे हैं।

सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के बावजूद बुनियादी सुविधा का अभाव

केंद्र सरकार 'अमृत भारत' योजना के तहत देवलाली स्टेशन का कायाकल्प तो कर रही है, लेकिन खाली प्लेटफॉर्म नागरिकों का मजाक उड़ा रहे हैं। स्टेशन को आधुनिक रूप दिया जा रहा है, पर बिना ट्रेनों के इस सजावट का यात्रियों के लिए कोई मोल नहीं है।

देशभर से प्रशिक्षण के लिए आने वाले जवानों को अपने घर जाने या ड्यूटी पर लौटने के लिए भारी सामान के साथ नासिक रोड स्टेशन भागना पड़ता है। स्टेशन पास होने के बावजूद ऑटो और निजी वाहनों पर अतिरिक्त्त खर्च कर दूसरे स्टेशन जाना मजबूरी बन गया है।

मुबई की लाइफलाइन कही जाने वाली रेल सेवा यहीं दम तोड़ती दिख रही है। सुबह पंचवटी और सेवाग्राम एक्सप्रेस के जाने के बाद मानो स्टेशन पर सन्नाटा पसर जाता है।

इन दो ट्रेनों के बाद सीधे 10 घंटे बाद तपोवन एक्सप्रेस का नंबर आता है। 10 घंटे स्टेशन पर बैठने के बजाय लोग निजी बसों और एसटी की ओर रुख कर रहे हैं, जो जेब पर भारी पड़ रहा है।

सावरकर भक्तों और व्यापार पर भी पड़ी मार

देवलाली का महत्व केवल सैन्य नजरिए से ही नहीं, बल्कि आस्था और व्यापार से भी जुड़ा है। स्वातंत्र्यवीर सावरकर की जन्मभूमि होने के नाते यहां देशभर से भक्त आते हैं, जिन्हें अब यातायात की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

साथ ही सिन्नर, इगतपुरी और नासिक तहसील के किसानों के लिए भी यह स्टेशन माल ढुलाई और व्यापार का मुख्य जरिया था, जो अब ठप पड़ता दिख रहा है।

स्थानीय नागरिकों की अंतिम उम्मीद अब आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले पर टिकी है। उनका मानना है कि कुंभ के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए शायद रेल मंत्रालय की नींद खुले और देवलाली को उसके पुराने स्टॉपज वापस मिल सकें, नागरिकों और सैन्य अधिकारियों ने मिलकर मांग की है कि सेना के सम्मान और जनता की सुविधा के लिए यहाँ ट्रेनों का ठहराव तुरत बढ़ाया जाए।

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