प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Lasalgaon Onion Market: नासिक लासलगांव अरब देशों में चीन और पाकिस्तान का प्याज कम कीमत पर उपलब्ध होने के कारण भारतीय प्याज के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके चलते देश में प्याज के बाजार भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई है और प्याज उत्पादक किसान गंभीर चिंता में हैं।
लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति में पिछले पंद्रह दिनों के भीतर प्याज के दामों में करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। वहीं, बीते एक सप्ताह में ही भाव लगभग 600 रुपये तक नीचे आ गए हैं।
इस गिरावट से नासिक जिले के प्याज उत्पादक किसानों को अनुमानित 175 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लासलगांव सहित देश की विभिन्न कृषि उपज बाजार समितियों में लाल प्याज की बड़े पैमाने पर आवक होने से दामों पर दबाव बना है।
इसके साथ ही बांग्लादेश में जारी हिंसक हालात के कारण भारत से प्याज निर्यात सीमित मात्रा में ही हो पा रहा है। वहीं, अरब देशों में चीन और पाकिस्तान का प्याज सस्ते दामों में उपलब्ध होने से भारतीय प्याज की मांग घट गई है।
जिस तरह प्याज महंगा होने पर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार प्याज स्थिरीकरण निधि पर करोडों रुपये खर्च करती है, उसी तरह दाम गिरने पर प्याज उत्पादकों को अनुदान देने की व्यवस्था भी हर वर्ष की जानी चाहिए,
जयदत्त होलकर, संचालक, एपीएमसी
66 अरब देशों में चीन और पाकिस्तान का प्याज सस्ते दामों में मिलने से भारतीय प्याज के निर्यात पर असर पड़ा है। जिसकी वजह से किसानों को प्याज की कीमत नहीं मिल पा रही है।
प्रवीण कदम, दीपक जाधव
मौजूदा बाजार भाव से परिवहन खर्च भी नहीं निकल पा रहा, जिससे प्याज उत्पादक किसान बेहद हताश हो गए हैं।
प्याज उत्पादक किसान- दीपक जाधव
लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति में लगभग 1,505 वाहनों के माध्यम से 23,420 क्विंटल लाल प्याज की आवक हुई। इस प्याज को अधिकतम 2,200 रुपये, न्यूनतम 700 रुपये और औसतन 1,625 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला, लगातार गिरते दामों के कारण किसानों का कहना है कि आने वाले समय में लाल प्याज का उत्पादन खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
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किसानों ने मांग की है कि राज्य और केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर अधिक से अधिक प्याज का निर्यात सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।