नाबालिग बच्चे के हत्यारोपी को फांसी की सजा दो, मालेगांव में आदिवासी एकलव्य समाज का मोर्चा

Adivasi Eklavya Samaj: पाडलदे गांव में 15 वर्षीय नाबालिग बालक समाधान बलाराम माली की हत्या की घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मालेगांव में आदिवासी एकलव्य समाज का मोर्चा
मालेगांव में आदिवासी एकलव्य समाज का मोर्चा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nashik News: मालेगांव तहसील के पाडलदे गांव में 15 वर्षीय नाबालिग बालक समाधान बलाराम माली की हत्या की घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस मामले में आरोपी सोमनाथ हिरामण झिंजर (35) को फांसी की सजा दी जाए और माली परिवार को न्याय मिले, इस मांग को लेकर आदिवासी एकलव्य समाज संगठन की ओर से सोमवार 15 सितंबर को अपर जिलाधिकारी कार्यालय पर भव्य मोर्चा निकाला गया।

इस मोर्चे का नेतृत्व छगन पवार, रमेश माली, वसंत अहिरे, राजेंद्र माली, मंगला तलवारे, निर्मला वाघ और योगिता खैरनार ने किया। मोर्चा मोसमपूल चौक से शुरू होकर कॅम्प रोड होते हुए अपर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा, जहां नायब तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा गया।

मोर्चे में सामील समाजबंधु

इस मोर्चे में रंजना गायकवाड, रामकृष्ण पवार, अमृत सोनवणे, अनिल पानपाटील, लोटन दलवी, भरत गायकवाड, मंगलदास मोरे, राज नवरे, संदीप सोनवणे, योगेश दलवी, रवी माली, संतोष पवार, पुनाजी गांगुर्डे, कौतिक जाधव, विकास पवार, किरण माली, गणेश ठाकरे, सोपान माळी, भगवान सोनवणे समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

घटना कैसे हुई?

दिनांक 12 सितंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे, आरोपी सोमनाथ झिंजर समाधान माली के घर गया और उसे गाय-बैल बांधने चलो कहकर अपने साथ ले गया लेकिन रात तक समाधान घर नहीं लौटा। उसकी मां कल्पना माली ने झिंजर को फोन किया, परंतु उसने कोई जवाब नहीं दिया। समाधान के लापता होने की खबर पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों और पुलिस द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें समाधान का शव गांव के पास की एक कुएं में मिला। मृत शरीर पर कई जगह नाखून के निशान और गंभीर चोटें पाई गईं, जिससे हत्या की आशंका और भी प्रबल हो गई। कल्पना माली की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज करते हुए सोमनाथ झिंजर को गिरफ्तार कर लिया।

पहले भी हुआ था थाने पर मोर्चा

इस घटना के बाद समाधान की मां, परिजन और गांववालों ने तालुका पुलिस थाने पर मोर्चा निकाला था। पुलिस द्वारा गहन जांच का आश्वासन देने पर आंदोलन को स्थगित किया गया था लेकिन अब तक न्याय नहीं मिलने के कारण आदिवासी समाज में भारी रोष फैल गया है।

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