Muslim-Dalit Vote Bank:नासिक मनपा चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Election: नासिक मनपा चुनाव में ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (एमआईएम) ने 6 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। हालांकि, पार्टी के सभी उम्मीदवार चुनाव हार गए, लेकिन उन्हें मिले वोटों के आंकड़े ने भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं छेड़ दी हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एमआईएम का विस्तार आगामी समय में कुछ प्रमुख दलों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
एमआईएम ने मुस्लिम और दलित वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए प्रभाग 14, 23, 24 और 30 में प्रत्याशी खड़े किए थे। विशेष रूप से प्रभाग 30 में एमआईएम उम्मीदवार मोहसिन शाह तीसरे स्थान पर रहे, जिन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार), शिवसेना (उबाठा) और अन्य स्थापित दलों को पीछे छोड़ दिया। नासिक के ‘दुबई वार्ड’ (प्रभाग 14) में हालांकि एमआईएम को विशेष सफलता नहीं मिली, क्योंकि वहां के मुस्लिम मतदाताओं ने दलीय राजनीति के बजाय स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता दी।
एमआईएम के शहर अध्यक्ष रमजान पठान का कहना है कि उनकी पार्टी मुस्लिम, दलित और उपेक्षित वर्गों के लिए काम करती है। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य भर में सवर्ण उम्मीदवारों की जीत यह दर्शाती है कि पार्टी का आधार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, नासिक में रिपब्लिकन पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों का अस्तित्व इस चुनाव में लगभग समाप्त होता दिखा।
सेक्युलर मतदाताओं के सामने अब यह बड़ा प्रश्न है कि भाजपा का विरोध करने के लिए किस पर भरोसा किया जाए? शिवसेना (उबाठा), कांग्रेस और राकांपा के नेताओं द्वारा लगातार पाला बदलने के कारण मतदाताओं का इन दलों से विश्वास कम हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमआईएम का बढ़ता प्रभाव जितना उस पार्टी के लिए फायदेमंद है, उतना ही भाजपा के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। जब दो विपरीत विचारधारा वाले दल आमने-सामने होते हैं, तब चुनावी मुद्दों के बजाय ‘हिंदू-मुस्लिम’ ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ जाती है, जिससे दोनों ही दलों को अपने-अपने कट्टर वोट बैंक को साधने में आसानी होती है।
नासिक मनपा चुनाव के प्रभाग क्रमांक 30 की मतगणना में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (एमआईएम) ने अब कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग द्वारा तीसरे दौर के अंत में घोषित आंकड़ों और अंतिम आधिकारिक आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर है, जो लोकतंत्र के साथ मजाक है।
अधिकारियों की घोषणा पर उठे सवालों के अनुसार, एमआईएम के शहर अध्यक्ष रमजान पठान ने कहा कि मतगणना के दौरान चुनाव अधिकारी अर्पिता ठुबे ने एमआईएम उम्मीदवार मोसिन शाह को 9000 से अधिक वोट मिलने की बात कही थी, जिसका वीडियो कार्यकर्ताओं ने रिकॉर्ड किया है। हालांकि, बाद में अधिकारी ने इसे मानवीय भूल बताया।
पठान ने आरोप लगाया कि अंतिम सूची में न केवल एमआईएम बल्कि अन्य उम्मीदवारों के वोटों में भी रहस्यमयी तरीके से कटौती की गई। अंतिम आंकड़ों में मोसिन शाह के वोट 9000 से घटकर मात्र 4508 रह गए। पठान ने सवाल उठाया कि घोषित मतों में यह गिरावट कैसे आई और आरोप लगाया कि किसी खास उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने के लिए यह हेरफेर किया गया।
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शिवसेना (उबाठा) के पराजित उम्मीदवार निशांत जाधव ने भी चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जाधव ने कहा, “वहां स्थिति बेहद संदिग्ध थी। पुलिस ने रास्ते बंद कर दिए और हमें मतगणना के आंकड़ों की पर्ची तक नहीं दी गई। हमारी आपत्तियों और पुनर्मतगणना की मांग को अधिकारियों ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।” प्रशासन ने अचानक भ्रम की स्थिति पैदा कर चुनावी प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में ले लिया। उन्होंने एमआईएम के अदालत जाने के फैसले का समर्थन किया है।
मतगणना के दौरान हुए हंगामे को शांत करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा था। एमआईएम शहर अध्यक्ष रमजान पठान ने स्पष्ट किया, “हमारा उम्मीदवार जीता या हारा, यह मुद्दा नहीं है, मुद्दा चुनावी पारदर्शिता का है। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए हम अदालत में यह लड़ाई लड़ेंगे ताकि भविष्य में ऐसी धांधली न हो।”