केडीएमसी नगररचना विभाग में ‘नए पद’ बनाकर नियुक्ति का मामला, विधानसभा में उठा सवाल
KDMC के नगररचना विभाग में कथित तौर पर बिना सरकारी मंजूरी नए पद बनाकर अधिकारियों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। विधानसभा में सवाल उठने के बाद पूरे प्रकरण पर सियासी और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
कल्याण डोंबिवली महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
KDMC Town Planning Post Controversy: महानगरपालिका (केडीएमसी) के नगररचना विभाग में कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर नए पद सृजित कर अधिकारियों की नियुक्ति किए जाने का मामला अब सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
विधानसभा में मुद्दा उठते ही पूरे प्रकरण पर सवालों की बौछार हो गई है और संबंधित कई अधिकारी अब घेरे में आते दिखाई दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले कल्याण डोंबिवली मनपा की स्वीकृत पद संरचना और शासन की मंजूरी के बिना ही नगररचना विभाग में ‘नगररचना विकास अधिकारी’ (टाउन प्लानिंग डेवलपमेंट ऑफिसर) और ‘उप अभियंता’ (डिप्टी इंजीनियर) जैसे पद तैयार किए गए। बाद में इन पदों पर सुरेंद्र टेंगले, दीपक मोरे और सुहास पवार की नियुक्ति भी कर दी गई।
विस सत्र में सरकार से सीधे मांगा गया जवाब
मामला तब और गरमा गया, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक शशिकांत शिंदे ने मौजूदा विधानसभा सत्र में सरकार से सीधे सवाल दाग दिए। उन्होंने पूछा कि जब इन पदों को राज्य सरकार की मंजूरी ही नहीं थी, तो इन्हें किस अधिकार से बनाया गया।
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मेरा मूल पद उप अभियंता का है, लेकिन मुझे कार्यकारी अभियंता (शहर विकास व नियोजन) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पीएलए और टीडीआर की मंजूरी के लिए नहीं, बल्कि टाउन प्लानर का मूल चार्ज होने के कारण मैं टाउन प्लानिंग विभाग में काम कर रहा हूं। कुछ लोग जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
– सुरेंद्र टेंगले, टाउन प्लानर, केडीएमसी
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मनपा में पदों पर काम करते दिखाई दे रहे अधिकारी
उपमुख्यमंत्री के इस जवाब ने पूरे मामले को और उलझा दिया है। एक तरफ सरकार ऐसे पदों के अस्तित्त्व से इनकार कर रही है, तो दूसरी तरफ महानगरपालिका में इन पदों पर अधिकारी काम करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में अब इन नियुक्तियाँ की वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
