हम ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं…आप भी करें…, सड़क सुरक्षा के लिए ‘जन आक्रोश’ की ‘गांधीगिरी’
Road Safety: नागपुर में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया गया। इस अभियान में जन आक्रोश के 30 कार्यकर्ता शामिल हुए।
- Written By: प्रिया जैस
सड़क सुरक्षा अभियान (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur News: सीताबर्डी के वेरायटी चौक सिग्नल पर ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने वाले या बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों को ‘हम ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं …आप भी करें…’ संदेश वाले बोर्ड थमाकर सड़क सुरक्षा के लिए कार्यरत सामाजिक संस्था ‘जन आक्रोश’ ने गुरुवार को ‘गांधीगिरी’ का अनोखा तरीका अपनाया।
आमतौर पर पीले टी-शर्ट पहने संगठन के स्वयंसेवक सिग्नल पर खड़े होकर ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं और चालकों से अनुशासन व सुरक्षा बनाए रखने की अपील करते हैं। जो वाहन चालक सिग्नल तोड़ते हैं या लेन की अनदेखी करते हैं, उन्हें ये स्वयंसेवक विनम्रता से रोककर ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए समझाते हैं।
जन आक्रोश के 30 कार्यकर्ता शामिल
लेकिन गुरुवार को संस्था ने एक अनोखा कदम उठाया। ट्रैफिक नियमों का पालन करने वाले और नियम तोड़ने वाले दोनों ही वाहन चालकों को उन्होंने हाथ में ‘हम ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं… आप भी करें’ लिखे बोर्ड थमाए, ताकि वे खुद भी और दूसरों को भी सड़क सुरक्षा के लिए प्रेरित करें। इस अभियान में जन आक्रोश के 30 कार्यकर्ता शामिल थे।
सम्बंधित ख़बरें
Pune Metro Phase 2 Project को मिली रफ्तार, 9,857 करोड़ की परियोजना बदलेगी शहर की ट्रांसपोर्ट तस्वीर
‘छोटा मटका’ बाघ केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अब गोरेवाड़ा की तर्ज पर ताडोबा में बनेगा रेस्क्यू सेंटर
Maharashtra Fake Call Center: कॉल सेंटर घोटाले में अफसरों की मिलीभगत, CBI जांच पर उठे सवाल
क्या SC आरक्षण को टुकड़ों में बांट रही है सरकार? नितिन राउत ने अनंत बदर समिति की रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल
यह भी पढ़ें – मतदाता सूची से नाम गायब? दी गई चुनौती, हाई कोर्ट सख्त, कहा- जिला चुनाव अधिकारी करें जल्द निर्णय
सचिव रवींद्र कासखेडीकर ने कहा कि जब किसी को कहा जाता है कि यह मत करो तो इंसान अक्सर वही काम करता है। यह मानव स्वभाव है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने अपने अभियान में थोड़ा बदलाव किया है। गांधीजी के सिद्धांतों को अपनाकर हम ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों को यह बोर्ड देते हैं और उन्हें हमारे साथ खड़ा होने के लिए कहते हैं। वे इसका विरोध नहीं करते, न ही इसे सजा मानते हैं बल्कि आत्म-सुधार का अवसर समझते हैं।
चालान में जाता है समय
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के पास सीमित जनशक्ति है जिनका अधिकतर समय चालान जारी करने और कागजी कार्यवाही में चला जाता है। हम अधिक मानवीय और प्रभावी तरीके से योगदान देना चाहते थे। उल्लंघन करने वालों को सजा नहीं बल्कि आत्म-बोध के माध्यम से सिखाना चाहते थे।
