पिंटू शिर्के हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राजू भद्रे सभी आरोपों से बरी
Nagpur News: सुप्रीम कोर्ट ने पिंटू शिर्के हत्याकांड में आरोपी राजू भद्रे को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस मामले में सबूतों में गड़बड़ी मिलने के कारण पुराना दोषी ठहराने वाला फैसला रद्द कर दिया गया
- Written By: पूजा सिंह
फाइल फोटो
Verdict In Pintu Shirke Murder Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सिटी के बहुचर्चित हाई-प्रोफाइल पिंटू शिर्के हत्याकांड में आरोपी राजू भद्रे को बरी कर दिया। 2 दशक पूर्व हुए इस हत्याकांड ने सिटी को हिलाकर रख दिया था। भद्रे की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों द्वारा सुको में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी।
इस पर लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया। भद्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पैरवी की। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की विस्तृत जांच के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के मामले में विसंगतियां पायीं और भद्रे को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले ने पिछली सभी दोषसिद्धियों को पलट दिया, जो ताज़ा तर्कों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद दिया गया।
सिटी को दहलाने वाला हत्याकांड
11 फरवरी 2002 को स्वप्निल उर्फ पिंटू शिर्के की हत्या नागपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर के अंदर उस समय की गई थी जब उन्हें अदालत की सुनवाई के लिए पेश किया जा रहा था। कोर्ट के हाई सिक्योरिटी क्षेत्र में हुए इस हत्याकांड ने न्यायिक और पुलिस सुरक्षा में बड़ी खामियों को उजागर किया था, जिससे उस समय व्यापक आक्रोश फैल गया था। जांच में बाद में पता चला कि हत्या कथित तौर पर एक लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद से जुड़ी थी, जिसमें राजू भद्रे, पूर्व नगरसेवक विजय माटे और उनके सहयोगी शामिल थे।
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लंबी कानूनी लड़ाई
2013 : नागपुर सत्र न्यायालय ने भद्रे सहित कई आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
2015 : हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने इन दोषसिद्धियों को बरकरार रखा।
2016 : भद्रे को अपील लंबित रहने के दौरान स्वास्थ्य कारणों से जमानत दी गई थी।
2017: सर्वोच्च न्यायालय ने भी भद्रे सहित 7 व्यक्तियों के लिए आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा था।
मुकदमे में साक्ष्यों की सटीकता
राजू भद्रे की यह बरी नागपुर के सबसे कुख्यात आपराधिक मामलों में से एक में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला लंबे समय से चल रहे हत्या के मुकदमों में साक्ष्यों की सटीकता और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के महत्व को रेखांकित करता है।
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इस बीच मृतक पिंटू शिर्के का परिवार, जो न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहा था, कथित तौर पर इस फैसले से नाराज है। यह मामला एक बार फिर अदालत परिसर के भीतर सुरक्षा, विचाराधीन कैदियों की सुरक्षा और महाराष्ट्र में संगठित अपराध के मामलों से निपटने के तरीकों के बारे में चिंताओं को उजागर करता है।
