परीक्षा संकट दूर करने के लिए टास्क फोर्स गठित करने की मांग, सीनेट सदस्य बाजपेयी ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन
RTMNU Result Delay: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में 190 लंबित परिणामों और अव्यवस्थित शैक्षणिक सत्र को लेकर सीनेट सदस्य एड. मनमोहन बाजपेयी ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
- Written By: गोरक्ष पोफली
RTMNU की फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur University Exams 2026: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) में परीक्षाओं और परिणामों को लेकर मचे घमासान के बीच अब सीनेट सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है। विश्वविद्यालय की शीतकालीन परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने में हो रही देरी और ग्रीष्मकालीन परीक्षाओं के आयोजन में व्याप्त अनिश्चितता को देखते हुए, सीनेट सदस्य एड. मनमोहन बाजपेयी ने कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर से मुलाकात कर एक विशेष कार्यदल (Task Force) गठित करने की मांग की है।
सॉफ्टवेयर कंपनी पर निर्भरता कम करने की सलाह
एड. मनमोहन बाजपेयी ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा संचालन के लिए निजी सॉफ्टवेयर कंपनी कोएम्प्ट (Coempt) पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। कंपनी की तकनीकी खामियों के कारण शैक्षणिक सत्र 2025-26 पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रीष्मकालीन परीक्षाओं को त्रुटिरहित और समय पर संपन्न कराने के लिए अनुभवी प्राचार्यों, प्राध्यापकों, वरिष्ठ लिपिकों और सीनेट सदस्यों को शामिल कर एक त्वरित कार्यदल बनाया जाए, जो युद्धस्तर पर काम कर सके।
अव्यवस्थित शैक्षणिक कैलेंडर
बाजपेयी के अनुसार, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा खामियाजा अंतिम वर्ष के छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। शीतकालीन परीक्षाओं के लगभग 190 परिणाम अभी भी घोषित नहीं किए गए हैं। जो परिणाम घोषित हुए हैं, उनमें भी गंभीर तकनीकी और अंक संबंधी त्रुटियां पाई जा रही हैं। परिणामों में देरी के कारण छात्र न तो उच्च शिक्षा के लिए आवेदन कर पा रहे हैं और न ही MPSC या UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो पा रहे हैं। इस विलंब के कारण शैक्षणिक सत्र 2026-27 के समय पर शुरू होने पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
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प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ टकराव टालने का सुझाव
सीनेट सदस्य ने कुलपति को सलाह दी कि ग्रीष्मकालीन परीक्षाओं की समय सारणी (Time Table) तैयार करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि तिथियां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ न टकराएं। यदि किसी विशेष परिस्थिति में परीक्षाएं एक ही दिन होती हैं, तो छात्र के पास पर्याप्त प्रमाण होने पर उसके लिए पुनर्परीक्षा (Re-exam) का विकल्प पहले से घोषित किया जाना चाहिए।
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विद्यार्थियों की मांगें और उम्मीदें
छात्र संगठनों और सीनेट सदस्यों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो हजारों छात्रों का एक साल बर्बाद हो सकता है। अब सभी की निगाहें कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वे इस टास्क फोर्स के प्रस्ताव को मंजूरी देकर विश्वविद्यालय की साख बचाने का प्रयास करेंगी।
