भावुक कर देने वाली कहानी: 21 साल बाद परिवार से मिली महिला, नागपुर मनोरुग्णालय की पहल लाई खुशियां
Nagpur Regional Mental Health Hospital: नागपुर के प्रादेशिक मनोरुग्णालय के प्रयासों से 21, 19 और 9 वर्षों से परिवारों से बिछड़ी तीन महिलाएं अपने परिजनों से मिल सकीं। यह पुनर्मिलन भावुक कर देने वाला रह
- Written By: अंकिता पटेल
प्रादेशिक मनोरुग्णालय, परिवार से पुनर्मिलन,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Mental Health Care: नागपुर जिले में मानसिक बीमारी के चलते अपने घर, गांव और शहरों से भटकने वाले मरीजों को स्वस्थ होने के बाद उनके परिजनों तक पहुंचाने में प्रादेशिक मनोरुग्णालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में तीन मरीजों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। नांदेड़ जिले की 56 वर्षीय महिला पिछले 21 वर्षों से अपने परिवार से दूर थी। वहीं अहिल्या नगर जिले की एक महिला भी 19 वर्षों बाद अपने घर पहुंची। तीसरी महिला 9 वर्षों से लापता थी।
जब प्रादेशिक मनोरुग्णालय की टीम नांदेड के गांव पहुंची तो परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। वहीं अहिल्या नगर की रहने वाली भी घर पहुंची। वह लंबे अर्से बाद अपनी बेटी को देखकर खुशी से रो पड़ी। करीब दो दशक बाद हुए इस मिलन ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। तीसरी महिला करीब 9 वर्षों से लापता थी।
बाद में उसका मनोरुग्णालय में इलाज किया गया। इन महिलाओं के पुनर्मिलन के लिए महीनों तक प्रयास किये गये। समाज सेवा अधीक्षक कुंदा काटेखाये-बिडकर ने संबंधित महिलाओं के मूल पते और परिवारों की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए, इस दौरान पुलिस से सतत संपर्क किया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में नर्स संजया गणवीर, रुमा मालपे, सुशीला गायकवाड़ और प्रतीक्षा भुते ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्बंधित ख़बरें
गोंदिया: नवेगांव-नागझिरा में शुरू हुई ‘माधवझरी सफारी’, अब साल के 365 दिन मिलेगा जंगल भ्रमण का रोमांच
महाराष्ट्र में बैलेट पेपर के लिए चुनाव बहिष्कार के राज ठाकरे के फॉर्मूले को सुप्रिया सुले और उद्धव का समर्थन
प्रशासन के दावे फेल? मानसून सिर पर, पीली नदी बदहाल; 1,000 परिवारों पर बाढ़ का खतरा
वर्धा में 5 माह में 55 किसान आत्महत्या के शिकार, 24 परिवारों को ही मिली आर्थिक सहायता
पिछले माह 5 लोगों को परिवार से मिलाया
प्रादेशिक मनोचिकित्सालय द्वारा मई में 5 महिला मनोरोगियों का पारिवारिक पुनर्मिलन कराया गया था। एक महिला का तेलंगाना में अंतरराज्यीय संस्थागत पुनर्वास भी किया गया था।
यह भी पढ़ें:- प्रशासन के दावे फेल? मानसून सिर पर, पीली नदी बदहाल; 1,000 परिवारों पर बाढ़ का खतरा
प्रादेशिक मनोरुग्णालय के अधीक्षक डॉ. अमरीश मोहबे ने बताया कि मानसिक बीमारी से ठीक होने के बाद दोबारा परिवार और समाज से जोड़ना ही उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुनर्मिलन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को उसकी पहचान, अपनापन और सम्मान वापस दिलाने का मानवीय प्रयास है।
