प्रशासन के दावे फेल? मानसून सिर पर, पीली नदी बदहाल; 1,000 परिवारों पर बाढ़ का खतरा

Nagpur Monsoon Preparedness: मानसून से पहले नागपुर की पीली नदी में कचरा, जलपर्णी और गंदगी का अंबार लगा है। स्थानीय नागरिकों ने सफाई कार्य पर सवाल उठाते हुए बाढ़ का खतरा जताया है।
Administration's claims fall flat? Monsoon imminent, Pili Nadi in shambles; 1,000 families face flood threat.
पीली नदी, मानसून तैयारी, नदी सफाई,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Updated on

Nagpur Municipal Corporation: मानसून सिर में है। प्री मानसून किसी भी वक्त शुरू हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बता दें कि वांजरा क्षेत्र से बहने वाली पीली नदी के हालात बद से बदतर हो चुके हैं। यहां पीली नदी के हाल सफाई अभियान पोल खोल रहे हैं। ऐसे हालात देख मानसून पूर्व तैयारियों के दावे खोखले नजर आने लगे हैं।

मानसून से पहले नदी-नालों की सफाई नागपुर महानगरपालिका का एक मुख्य और चैलेंजिंग काम होता है। एक ओर प्रशासन द्वारा दावा किया जाता है कि नदी-नालों की सफाई के लिए कड़ी मशक्कत की जा रही है।

इन दावों का पूरी तरह से बंटाढार हो चुका है। वांजरा से बहने वाली पीली नदी में कूड़े-कचरा का ढेर, जलपर्णी और गंदगी की भरमार देखी जा सकती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में नदी की सफाई 20 प्रश भी नहीं हुई है। ऐसे में नदी के ओवरफ्लो होने का खतरा बना हुआ है। इससे 1,000 से अधिक परिवार भय के साये में जीवन बीता रहे हैं। यदि कोई अनहोनी होती है तो इसका जिम्मेदार केवल प्रशासन को ठहराया जाएगा।

गंदगी से लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर

नदी में गंदगी की भरमार से न केवल बाढ़ का खतरा बना हुआ है बल्कि स्वास्थ्य पर भी संकट मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गंदगी के कारण परिसर में दुर्गध फैली रहती है। इससे सांस लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कीड़े-मकोड़ों और मच्छरों की संख्या में बढ़ गई है। ऐसे में खतरनाक बीमारियों की चपेट में आने का खतरा रहता है।

फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

  • ज्ञात हो कि वर्ष 2023 में आई बाढ़ के दौरान जानमाल का नुकसान हुआ था। एक बार फिर मानसून सिर पर है।
  • ऐसे में वांजरा में पीली नदी के हाल देख लोगों चिंताएं बढ़ गई है। यहां नदी में पानी से अधिक कचरा और जलपर्णी देखी जा सकती है।
  • यदि समय पर काम पूरा नहीं किया गया तो एक बार फिर लोगों को बाढ़ के कहर का सामना करना पड़ेगा।

आखिर कब जागेगा प्रशासन

नदी-नाला सफाई को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा। मानसून की दस्तक को देखते हुए स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोग भय में जी रहे हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोये हुए हैं। - स्थानीय नागरिक, वरुण मेश्राम

जनता की तकलीफ नहीं दिखती

बारिश शुरू होने से पहले नदी-नालों की सफाई प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा। जिम्मेदार अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठ कर एसी की हवा खाते हैं। जनता की तकलीफ उन्हें नजर नहीं आती।

-स्थानीय निवासी, भारती ठाकरे

Navbharat Live
navbharatlive.com