

Education Minister Chandrakant Patil On Navbharat Social Impact Summit: "आज के इस आधुनिक दौर में भी कई ऐसी ऋषितुल्य विभूतियां हैं, जो समाज के उत्थान के लिए पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से समर्पित हैं। समाज के दर्द को अपना मानकर उसका निवारण करने वाले लोग ही वास्तव में आज के सच्चे ऋषि हैं। ऐसी महान हस्तियों को प्रोत्साहित करने और उनके मानवीय कार्यों को एक बड़ा मंच प्रदान करने का अत्यंत सराहनीय काम 'नवभारत ग्रुप' कर रहा है।"
यह विचार राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने व्यक्त किए। वे पुणे में आयोजित 'नवभारत सोशल इम्पैक्ट समिट 2026' में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस समारोह में ग्रांट मेडिकल फाउंडेशन के ट्रस्टी परवेज ग्रांट, रक्षक प्रतिष्ठान के सुशील मोझर, नवभारत ग्रुप के प्रेसिडेंट एस श्रीनिवास और नवभारत के ग्रुप एडिटर संजय तिवारी सहित कई प्रमुख नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
इस समिट में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सामाजिक जिम्मेदारी (सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हर व्यक्ति को अपने जीवन का कुछ समय और हिस्सा समाज सेवा के लिए अवश्य समर्पित करना चाहिए। अपने व्यवसाय या आय का एक निश्चित भाग समाज के वंचित और शोषित वर्ग के कल्याण के लिए अलग रखना और उनके दुखों को कम करने का प्रयास करना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी केवल कानून की कोई बाध्यता या शर्त नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति हमारी नैतिक जवाबदेही और सच्ची प्रतिबद्धता है।
चंद्रकांत पाटिल ने भारत के समृद्ध इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि समाज को वापस लौटाने (गिविंग बैंक टू सोसाइटी) की यह भावना हमारे देश में प्राचीन काल से चली आ रही है। रामायण काल से ही हमारे भीतर जनहित की भावना विकसित हुई है।
उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा, "धार्मिक स्थलों या मंदिरों में रखी दानपेटी केवल एक धार्मिक व्यवस्था मात्र नहीं है, बल्कि वह समाज के कल्याण में अपना छोटा सा योगदान देने की सामूहिक भावना का प्रतीक है। जनता स्वयं आगे बढ़कर समाज की भलाई के लिए दान करे, यह अनूठी संस्कृति हमारे देश की जड़ों में बहुत गहराई से समाहित है।"