Dharmendra Pradhan:केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) देश की नई पीढ़ी को “मैकाले मानसिकता” से बाहर निकालने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को अमल में लाने का एक सशक्त माध्यम होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 29 जुलाई 2020 को घोषित की गई थी, जिसमें स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में व्यापक सुधारों का प्रस्ताव किया गया है।
एक कार्यक्रम के सिलसिले में नागपुर आए प्रधान ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि एनईपी अब अपने छठे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और यह शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ‘मैकाले मानसिकता’ से बाहर निकलने की आवश्यकता पर बल दिया है। एनईपी 2020 देश की नई पीढ़ी को इस मानसिकता से मुक्त करने का माध्यम बनेगी।”
प्रधान ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि मातृभाषा में शिक्षा, योग्यता-आधारित तथा कौशल-आधारित अध्ययन के माध्यम से युवाओं और भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने समग्र मूल्यांकन, उद्यमिता और नवाचार पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी सृजित करने वाला बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी दिशा में कार्य कर रही है।
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उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 17 नवंबर को नई दिल्ली में छठे रामनाथ गोयनका व्याख्यान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से थॉमस मैकाले द्वारा फैलाई गई गुलामी की मानसिकता से देश को मुक्त करने का संकल्प लेने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2035 में मैकाले द्वारा भारत पर थोपी गई इस मानसिकता के 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे और अगले दशक में देश को इससे मुक्त होना होगा।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नागपुर के रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर का दौरा कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. के. बी. हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के स्मारक ‘दीक्षाभूमि’ में भी जाकर उन्हें नमन किया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)