
इंदौर की घटना (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: भारत के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पिछले एक दशक से इंदौर के पास है, लेकिन उसी इंदौर में इन दिनों पानी की लीकेज पाइप लाइनों के जरिये यहां के भागीरथपुरा इलाके में जिस तरह मौत का हाहाकार मचा हुआ है, उससे देश ही नहीं पूरी दुनिया स्तब्ध है। इंदौर में दूषित पानी से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है और बीमार लोगों की संख्या करीब 1400 से ऊपर है। 31 दिसंबर 2025 तक दूषित पानी को लेकर तरह-तरह की अटकलों और उनके खंडनों का जो बाजार गर्म था, उसे 1 जनवरी 2026 को महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी कि इलाके में पीने के पानी के साथ जानलेवा बैक्टीरिया की मिलावट पाइप लाइन में लीकेज के चलते सीवेज वॉटर से हुई है।
इसके 1 दिन पहले ही जिस तरह से बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक पत्रकार को इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर हड़काने की कोशिश की थी और यह इम्प्रेशन दिया था कि मीडिया जानबूझकर शहर को बदनाम कर रही है। अब तक की जांच से यह भी पुष्टि हो गई है कि जिन 15 लोगों की मौत अभी तक हुई है, उन सभी लोगों की जान नलों में आ रहे जहरीले पानी से ही हुई है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएचओ डॉ। माधव हसानी ने सैंपल की जांच रिपोर्ट को पत्रकारों के सामने पेश करते हुए कहा है कि साफ तौर पर पुष्टि होती है कि जिस पानी को इलाके के लोगों ने पीया है, उसमें जहरीले बैक्टीरिया की मिलावट है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पानी की पाइप लाइन में जो सीवेज का पानी मिला है, उस टॉयलेट में बहने वाला मल-मूत्र, बाथरूम व किचन का साबुन और पाउडर वाला पानी, फर्श साफ करने वाले केमिकल भी इस सीवेज पानी में बहते हैं और यही पीने वाले पानी की पाइप लाइन में शामिल हो गया है।
अगर इस पानी में कमर्शियल केमिकल संबंधी वेस्ट हैं, तो यह पानी इत इतना ज्यादा घातक हो गया है। भागीरथपुरा के लोग पिछले 1 साल से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे। फिर भी उनकी शिकायत प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने नहीं सुनी। निगमायुक्त दिलीप यादव ने गंदे पानी की शिकायतों को अनदेखा किया और पाइप लाइन की टेंडर प्रक्रिया पर नजर नहीं रखी। वहीं अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया पर भी उंगलियां उठ रही हैं, क्योंकि अगस्त में टेंडर हुए थे, जिन्हें उन्होंने रोक रखा था, लेकिन शिकायतें नहीं सुनी। निगम पार्षद कमल वाघेला से 4 महीनों से स्थानीय लोग शिकायत कर रहे थे। लेकिन वह इस संबंध में कोई त्वरित कार्यवाई कराने में असफल रहे।
यही आरोप इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर भी लग रहा है, क्योंकि पार्षद का कहना है कि उन्होंने महापौर से कई बार शिकायतें की, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया और अंतिम रूप से इस लापरवाही का प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हो सकता है, वो हैं बब्लू शर्मा, जो स्थानीय इलाके के जल कार्य प्रभारी हैं और लगातार दूषित पानी की सप्लायी पर उसका ध्यान आकर्षित कराये जाने पर भी इस संबंध में उन्होंने कोई कार्यवाई करने की नहीं सोची। इस त्रासदी में एक 5 माह के बच्चे अव्यान की मौत महज इसलिए हो गई, क्योंकि उसने जो दूध पीया था, उसमें सिर्फ 5 मिलीग्राम यही दूषित पानी मिलाया गया था। इंदौर की अब तक की जितनी साख थी, उसमें बट्टा इसलिए भी लग चुका है, क्योंकि ये भीषण त्रासदी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, आत्ममुग्ध ब्रांडिंग और जमीनी सच्चाई से कटे तंत्र की उपज है।
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भागीरथपुरा इलाके में पेय जल में सीवेज का पानी प्रशासन की लापरवाही के कारण पीने वाले पानी में मिल गया है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी खुद पत्रकारों के सामने आकर इस बात को स्वीकारा है और आशंका जतायी है कि इलाके में स्थित चौकी के पास लीकेज वाली जगह है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है और मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करके दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने की बात कही है।
लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा






