Ticket Counter Shortage:नागपुर रेलवे स्टेशन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Railway Station: मध्य रेल के प्रमुख नागपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटरों की संख्या लगातार घटाए जाने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारतीय यात्री केंद्र, नागपुर ने मध्य रेल प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि स्टेशन पर प्रतिदिन बढ़ती यात्री संख्या के अनुपात में टिकट काउंटर कम करना यात्रियों के हितों के विरुद्ध है।
नागपुर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब 150 से अधिक मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर और लोकल ट्रेनें संचालित होती हैं। इन ट्रेनों के माध्यम से औसतन 40,000 से 50,000 यात्री प्रतिदिन स्टेशन से आवागमन करते हैं। इसके बावजूद स्टेशन के पूर्व और पश्चिम दोनों छोरों पर आरक्षण और जनरल टिकट काउंटरों की संख्या में लगातार कटौती की जा रही है।
पश्चिम छोर पर जहां पहले आरक्षण के पांच काउंटर थे, अब उन्हें घटाकर तीन कर दिया गया है। इसी प्रकार जनरल टिकट काउंटरों की संख्या भी छह से घटाकर तीन कर दी गई है। पूर्व छोर पर भी आरक्षण और जनरल टिकट काउंटरों की संख्या में कमी की गई है।
भारतीय यात्री केंद्र के सचिव बसंत कुमार ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित यात्रियों के लिए अलग सुविधा की घोषणा तो की जाती है, लेकिन व्यवहार में उन्हें भी लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। टिकट काउंटरों की कमी के कारण नकद टिकट खिड़कियों पर लंबी लाइनें लग रही हैं, जिससे अव्यवस्था बढ़ रही है और यात्रियों को समय पर टिकट नहीं मिल पा रहा है।
उल्लेखनीय है कि नागपुर स्टेशन पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में यात्रियों और आगंतुकों को पहले ही प्रवेश-निकास, प्लेटफॉर्म तक पहुंच और पार्किंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में टिकट काउंटरों की संख्या घटाना रेलवे प्रबंधन की बड़ी चूक मानी जा रही है।
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यात्री केंद्र का कहना है कि मार्च-अप्रैल में परीक्षाओं, विवाह सीजन और गर्मी की छुट्टियों के कारण यात्रियों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं। संगठन ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए आरक्षण और जनरल टिकट काउंटरों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए। समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो यात्रियों की परेशानी और अव्यवस्था के लिए पूरी तरह रेलवे प्रशासन जिम्मेदार होगा।