नागपुर के रेलवे ट्रैक पर लौटे अपराधी! ‘लोचा गैंग’ ने बदला धंधा, RPF बेखबर, सुरक्षा पर गंभीर सवाल
Central Railway Nagpur: नागपुर में अपनी वायरल रील से मशहूर हुआ ‘लोचा गैंग’ फिर एक बार चर्चा में आ गया है। लोचा गैंग ने अपना धंधा बदल लिया है लेकिन RPF बेखबर है।
- Written By: प्रिया जैस
ट्रैक पर बेच रहे संतरा (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur News: करीब 4 महीने पहले दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल नागपुर मंडल के तहत मोतीबाग परिसर से लगे रेलवे ट्रैक पर दादागिरी वाली रील बनाकर वायरल होने वाली गैंग के सदस्य अब पटरियों के किनारे बैठकर पॉलीथिन में संतरों की पैकिंग कर बेच रहे हैं। हालांकि अब उन्होंने इलाका बदलकर मध्य रेल नागपुर मंडल में एंट्री ले ली है।
ज्ञात हो कि जून माह में इंस्टाग्राम पर ‘लोचा भाई’ नाम के एकाउंट पर इनकी दादागिरी वाले वीडियो वायरल हो रहे थे। इस गैंग के सरगना पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पटरी पार करना या यहां किसी प्रकार की बाधा या उत्पात मचाना दंडनीय अपराध है। रेलवे सुरक्षा बल को इस वीडियो की भनक तक नहीं थी।
सीआईबी को खबर तक नहीं
‘नवभारत’ में खबर छपने के बाद आरपीएफ एक्टिव हुआ। हालांकि कार्रवाई के नाम पर नतीजा शून्य ही रहा। अब इस आपराधिक गैंग के सदस्य डंके की चोट पर अवैध रूप से पटरियों के किनारे संतरे बिकवा रहे हैं। दूसरी ओर, रेलवे सुरक्षा बल और उसकी अपराध खुफिया शाखा (सीआईबी) को खबर तक नहीं है।
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कुछ दिन पहले ही IG ने किया था दौरा
देश के संवेदनशील नागपुर स्टेशन के पास पटरियों पर अपराधियों का जमावड़ा आरपीएफ की सुरक्षा-व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पिछले सप्ताह ही मध्य रेल जोन के रेलवे सुरक्षा बल के महानिरीक्षक (आईजी) विवेक सागर एक दिन के नागपुर दौर पर आये थे। इस दौरान उन्होंने मंडल के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा भी।
उन्हें सब ओके-ओके ही बताया गया। हालांकि ऐसा है नहीं। उल्लेखनीय है कि आरपीएफ की खुफिया शाखा सीधे तौर पर आईजी को रिपोर्ट करती है। ऐसे में खुफिया शाखा की नाकामी का श्रेय किसे दिया जायेगा, यह सोचने वाली बात है।
यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल
उल्लेखनीय है कि 4 माह पहले पटरियों पर दादागिरी भरी वायरल रील की खबर सार्वजनिक होते ही एसईसीआर और मध्य रेल नागपुर मंडल के रेलवे सुरक्षा बल में हड़कंप मच गया था। आनन-फानन में एक्शन के दावे किये गये। काफी देर तक मामला दोनों मंडलों की सीमा में उलझा रहा (जैसा की आमतौर पर होता है)।
सोशल मीडिया पर एकाउंट समेत सारी जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी न तो लोचा को पकड़ा गया, न ही रील में शामिल उसकी गैंग को। नतीजा आज सामने है कि इसी गैंग के सदस्य पटरियों के किनारे ही संतरे बेचने लगे हैं। पटरियों के किनारे ही आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों का जमावड़ा रेल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में लाने के लिए काफी है।
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बेअसर RPF एक्ट की धारा 145, 147
- रेलवे में इस प्रकार के अपराधों की रोकथाम के लिए रेलवे सुरक्षा बल एक्ट बनाया गया है।
- इसके तहत पटरियों को पार करना धारा 147 के तहत दंडनीय अपराध है।
- वहीं धारा 145 में पटरियों पर किसी प्रकार की बाधा या उत्पात मचाना भी अपराध है।
- लोचा के वायरल वीडियो में दोनों ही स्थिति साफ नजर आई थी।
- इसके बावजूद आज तक एसईसीआर आरपीएफ ने कोई कार्रवाई नहीं की।
- साफ है कि पूरे मामले में आरपीएफ एक्ट की दोनों ही धारायें बेअसर रहीं।
- दोनों मंडलों का आरपीएफ चाहता हो तो इस रील का जवाब कड़ी कार्रवाई के वीडियो से देकर ऐसे लोगों के मन में डर बना सकता था।
- आरपीएफ की कार्रवाई न होने से इसी गैंग के लोग अब पटरियों के किनारे अवैध धंधे करने लगे हैं।
- नतीजा सामने है कि अब एरिया बदलकर आरपीएफ को खुला चैलेंज किया जा रहा है।
