2 साल में 1.27 की काली कमाई? WCL अधिकारी के घर CBI की रेड, फर्जी कंपनी का खुलासा, मिले अहम दस्तावेज
WCL Officer Case: सीबीआई ने नागपुर में WCL अधिकारी संदीप सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया है। जांच में 45.23 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति समेत कई खुलासे हुए है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Nagpur WCL Officer Disproportionate Assets Case: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नागपुर में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई सोमवार को की गई, जिससे सरकारी कंपनियों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
सीबीआई के अनुसार, कोल इंडिया की सहायक कंपनी डब्ल्यूसीएल में एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत संदीप सिंह और उनकी पत्नी श्वेता सिंह इस मामले में आरोपी हैं। दोनों नागपुर के काटोल रोड क्षेत्र में निवास करते हैं।
दो साल में तेजी से बढ़ी संपत्ति
जांच एजेंसी ने बताया कि 1 अगस्त 2023 से 31 अगस्त 2025 की अवधि के दौरान संदीप सिंह ने अपने और अपनी पत्नी के नाम पर चल और अचल संपत्तियां अर्जित कीं। सीबीआई की जांच में सामने आया कि इस दौरान उनकी कुल आय 1.27 करोड़ रुपये थी, जबकि संपत्ति का मूल्य 1.62 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.87 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
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45 लाख रुपये से अधिक की आय से ज्यादा संपत्ति
सीबीआई के विस्तृत विश्लेषण में यह पाया गया कि दंपति के पास आय के ज्ञात स्रोतों से करीब 45.23 लाख रुपये अधिक की संपत्ति मौजूद है। यह संपत्ति उनकी घोषित आय की तुलना में कहीं अधिक बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि काले धन के लेन-देन के लिए आरोपी अधिकारी ने अपनी पत्नी के नाम पर एक फर्जी कंपनी का इस्तेमाल किया। इसी कंपनी के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किए जाने का संदेह जताया गया है।
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छापेमारी में अहम दस्तावेज जब्त
मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई ने अधिकारी के नागपुर स्थित आवास पर तलाशी ली। इस दौरान संपत्तियों और लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि जब्त दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है।
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांच के अधीन है और जांच के दौरान अन्य तथ्य सामने आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकरण को सरकारी उपक्रमों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
