NMC: गडकरी-फडणवीस की पसंद से तय होगा सभापति का 'ताज', क्या फिर चमकेगी पिंटू झलके की किस्मत?

NMC Standing Committee Chairman: नागपुर मनपा की तिजोरी की चाबी किसके पास होगी? जानें स्थायी समिति सभापति पद की दौड़ में शामिल भाजपा के दिग्गज पार्षदों के नाम और समीकरण।
Who will get the 'keys to the treasury' of Nagpur Municipal Corporation? Know the top contenders for the Standing Committee Chairman post from BJP.
एनएमसी बिल्डिंग (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा में महापौर पद के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थायी समिति सभापति का पद माना जाता है। स्थायी समिति सभापति के पास मनपा के तिजोरी की चाबी होती है। इसी स्थायी समिति के माध्यम से सिटी में होने वाले विकास कार्यों के लिए निधि का आवंटन होता है जिससे अब हालिया चुनावी नतीजों के बाद महानगरपालिका में स्थायी समिति सभापति का चयन राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थायी समिति सभापति भाजपा का होना तय है किंतु अब तक सभापति के लिए नाम पर चर्चा नहीं होने के कारण किसके पास मनपा के तिजोरी की चाबी होगी? किसके सिर पर यह ताज होगा? इसे लेकर कुछ वरिष्ठ पार्षदों में बेचैनी भी है।

माना जा रहा है कि सभापति का नाम तय करने में गडकरी-फडणवीस की आपसी सहमति ही अंतिम होगी। फरवरी के पहले सप्ताह में मेयर चुनाव के ठीक बाद स्थायी समिति के 16 सदस्यों और फिर सभापति का चुनाव संपन्न होगा।

...तो फिर पूर्व की खुल सकती है किस्मत

राजनीतिक जानकारों की मानें तो मनपा में महापौर पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण स्थायी समिति का सभापति पुरुष वर्ग से होने की संभावना जताई जा रही है। कुछ वरिष्ठ पार्षदों में बाल्या बोरकर, बंटी कुकड़े, पिंटू झलके जैसे पूर्व नागपुर के पार्षदों को मनपा में पद हासिल हो चुका है। यहां तक कि बोरकर और झलके स्थायी समिति के सभापति भी रहे। किंतु झलके का स्थायी समिति सभापति पद कोरोना की भेंट चढ़ गया जिससे यदि पूर्व नागपुर में यह पद देना हो तो उनके नाम पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में झलके की किस्मत फिर एक बार खुल सकती है। माना जा रहा है कि बंटी कुकड़े को इसके पूर्व परिवहन समिति के सभापति का पद दिया गया था। साथ ही भारतीय जनता पार्टी शहर अध्यक्ष का भी पद दिया गया था किंतु स्थायी समिति का सभापति नहीं दिया गया।

...तो दिवे, हिरणवार, गवई की लॉटरी

बताया जाता है कि महानगरपालिका की गत सत्ता में उत्तर नागपुर से वीरेन्द्र कुकरेजा को स्थायी समिति सभापति बनाया गया था जिससे फिर एक बार उत्तर नागपुर को स्थायी समिति का सभापति मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है। जानकारों की मानें तो पार्षद दिलीप दिवे को गत समय केवल शिक्षा समिति का सभापति बनाया गया, जबकि सुनील हिरणवार को कोई भी पद नहीं मिल पाया था। इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ पार्षद संदीप गवई को 3 टर्म से कोई भी पद नहीं दिया गया जिससे इस बार उनके नाम पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है।

भाजपा की आंतरिक रणनीति

बहुमत मिलने के बाद भाजपा नेतृत्व (विशेषकर देवेन्द्र फडणवीस और नितिन गडकरी गुट) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश चल रही है। चर्चा है कि पार्टी किसी ऐसे अनुभवी पार्षद को मौका देना चाहती है जो 4 साल के ‘प्रशासक राज’ के बाद पटरी से उतरी महानगरपालिका की अर्थव्यवस्था को संभाल सके।

पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी नागपुर के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाने के लिए सभापति पद का उपयोग किया जा सकता है। इस बार कई नये और शिक्षित युवाओं ने जीत दर्ज की है जिन्हें ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट्स को गति देने के लिए आगे लाया जा सकता है।

नये सभापति के सामने ‘बड़ी’ चुनौतियां

  • अमृत 2.0 योजना : केंद्र सरकार की जल योजनाओं के लिए फंड का सही आवंटन।
  • नाग नदी प्रकल्प : गडकरी का महत्वाकांक्षी प्रकल्प नाग नदी को वित्तीय प्रावधान देकर गति देना।
  • प्रशासक राज के टेंडर : पिछले 4 वर्षों में प्रशासक द्वारा लिए गए बड़े वित्तीय निर्णयों की समीक्षा।
  • राजस्व वृद्धि : संपत्ति कर वसूली को डिजिटल और प्रभावी बनाकर कर वृद्धि करना।
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