चैती छठ पूजा में किन बातों का का रखें विशेष ध्यान, नोट कीजिए वरना एक गलती से टूट जाएगा व्रत!

Chaiti Chhath Puja Vrat Ke Niyam: चैती छठ पूजा का व्रत बेहद कठिन और नियमों से भरा होता है। इस दौरान साफ-सफाई, सात्विकता और पूजा विधि का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
Chaiti Chhath Puja Me Kya Kare Aur Kya Na Kare
चैती छठ (सौ. Gemini)
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Chaiti Chhath Puja Me Kya Kare Aur Kya Na Kare: लोक आस्था का महापर्व चैती छठ हर साल की तरह इस बार भी उत्तर-पूर्व भारत सहित बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाएगा। इस वर्ष चैती छठ 22 मार्च से होकर 25 मार्च तक मनाया जाएगा

चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में व्रती विशेष नियमों का पालन करते हुए नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की परंपराओं को निभाते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

चैती छठ व्रत के दौरान विशेष ध्यान रखने योग्य बातें

  • अत्यधिक स्वच्छता और पवित्रता

चैती छठ व्रत के दौरान व्रती को स्वच्छता और पवित्रता का खास ध्यान रखना चाहिए। घर और पूजा स्थल की साफ़-सफाई रखें। पूजा के बर्तनों खासतौर से पीतल या मिट्टी को जूठे हाथों से न छुएं।

  • सात्विक आहार

नहाय-खाय के दिन से लेकर अंतिम अर्घ्य तक लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन पूरी तरह वर्जित है।

  • प्रसाद की शुद्धता

ठेकुआ और अन्य प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाएं। गेहूं को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर ही चक्की में पिसवाएं।

  • व्रत के नियम

36 घंटे के निर्जला व्रत के दौरान व्रती बिस्तर पर नहीं, बल्कि जमीन पर चटाई या चादर बिछाकर सोएं।

  • अर्घ्य के नियम

डूबते (संध्या अर्घ्य) और उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को शुद्ध जल और दूध से अर्घ्य दें।

  • फल-फूल

छठ पूजा में चढ़ाए जाने वाले फल, कंदमूल, नारियल आदि साफ और बिना कटे-फटे होने चाहिए।

  • नारंगी सिंदूर

महिलाएं नाक से लेकर मांग तक लंबा नारंगी सिंदूर लगाएं, जिसे बहुत शुभ माना जाता है।

छठ व्रत के मुख्य धार्मिक महत्व और फायदे

  • संतान की सुरक्षा और दीर्घायु

पौराणिक मान्यता के अनुसार, छठी मैया को बच्चों की रक्षक देवी माना जाता है। यह व्रत संतान के सुखी और लंबे जीवन के लिए सबसे प्रमुख माना जाता है।

  • सूर्य देव की विशेष कृपा

छठ पर सूर्य को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और तेज की प्राप्ति होती है। यह जीवन से बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।

  • पापों से मुक्ति

मान्यता है कि छठ का व्रत करने से पुन्नाम नरक से मुक्ति मिलती है और व्रती को मानसिक शुद्धि व आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

  • समृद्धि और सुख

यह व्रत परिवार में धन, धान्य और सुख-शांति लाने वाला माना जाता है।

  • मनोकामना पूर्ण

मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से जो भी व्रती छठी मैया से मांगता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से, उगते और डूबते सूर्य की किरणें त्वचा रोगों को दूर करने और शरीर को विटामिन D प्रदान करने में सहायक होती हैं।

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