BJP-BSP Vote Cut:नागपुर मनपा चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Election: नागपुर महानगरपालिका के आम चुनावों में भाजपा ने भले ही 120 सीटों का लक्ष्य तय किया हो, लेकिन यह लक्ष्य काफी हद तक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) द्वारा वोट काटे जाने पर निर्भर करता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई प्रभागों में बसपा प्रत्याशी जितना अधिक वोट काटेंगे, भाजपा के सत्ता के करीब पहुंचने की संभावना उतनी ही मजबूत होगी। इसी समीकरण के आधार पर भाजपा की चुनावी रणनीति टिकी हुई है।
जानकारों के अनुसार, भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षणों में यह स्पष्ट हो चुका था कि पार्टी के कई पूर्व पार्षदों के प्रति जनता में नाराजगी है। यही कारण है कि भाजपा ने इस बार 63 पूर्व पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया है। हालांकि, नए उम्मीदवार उतारने के बावजूद, यदि प्रभागों में वोटों का बंटवारा नहीं होता है तो इन प्रत्याशियों की जीत की संभावना कमजोर ही मानी जा रही है।
पिछले चुनाव में कुछ प्रभागों में शिवसेना के कारण भाजपा को नुकसान हुआ था, लेकिन उसका प्रभाव सीमित था। इस बार भी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) अलग चुनाव लड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पहले रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाती थी, लेकिन बाद के वर्षों में यह भूमिका काफी हद तक बसपा निभाने लगी है। धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा ही भाजपा के लिए जीत का सबसे बड़ा सूत्र बनता दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2017 के मनपा चुनावों और वर्तमान चुनाव में मतदाताओं की संख्या और प्रभागवार वोटरों के आंकड़ों में कोई बड़ा अंतर नहीं है। यदि 2017 में भाजपा को मिले वोटों का विश्लेषण किया जाए, तो कई प्रभागों में बसपा और कुछ जगहों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रत्याशियों द्वारा वोट काटे जाने से भाजपा को सीधा लाभ मिला था।
धर्मनिरपेक्ष वोटों के बंटवारे के चलते ही भाजपा लगातार तीसरी बार मनपा की सत्ता में आ सकी थी। इसी अनुभव के आधार पर भाजपा ने इस बार भी 120 सीटों का लक्ष्य तय किया है। 2017 के चुनाव परिणामों में करीब 20 प्रभागों की 70 से 80 सीटों पर वोट बंटवारे का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया था। इन 20 प्रभागों में वोट कटने से भाजपा 108 सीटों तक पहुंच पाई थी, जबकि कांग्रेस को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इन 20 प्रभागों में से अधिकांश उत्तर, दक्षिण और पश्चिम नागपुर विधानसभा क्षेत्रों में आते हैं, जहां बसपा, एनसीपी और कुछ हद तक शिवसेना का भी प्रभावी वोट बैंक है। दक्षिण नागपुर में पहले बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच (बरिएम) के कारण भाजपा को लाभ मिला था, लेकिन इस बार बरिएम के किसी भी प्रत्याशी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया है।
नगर परिषद चुनावों में बरिएम नेता सुलेखा कुम्भारे और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले के बीच सीधा मुकाबला भी देखा गया था। इसका असर दक्षिण नागपुर में कितना होगा, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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वर्ष 2017 के चुनाव आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 25 सीटें ऐसी थीं, जहां बसपा या एनसीपी प्रत्याशियों को मिले वोटों की संख्या से 50 प्रतिशत कम वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। कुछ प्रभागों में जीत का अंतर मात्र 500 से 1,000 वोटों का था, जबकि कुछ जगहों पर बसपा ने 5,000 से 9,000 वोट हासिल कर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित कर दी थी। इसके अलावा 3 से 4 सीटों पर एआईएमआईएम द्वारा मुस्लिम मतदाताओं में सेंध लगाने से भी भाजपा 100 से अधिक सीटें हासिल करने में सफल रही थी।