जून तक पालन करो वरना जुर्माना, स्कूल बस सुरक्षा नियमों पर हाई कोर्ट सख्त, 90 स्कूलों को चेतावनी

Nagpur High Court School Bus Safety: स्कूल बस सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही पर नागपुर HC सख्त हुआ। 90 स्कूलों को अंतिम मौका देते हुए रिकॉर्ड पेश करने और उल्लंघन पर जुर्माने की चेतावनी दी गई।
Comply by June or Face Fines: High Court Takes Strict Stance on School Bus Safety Norms; 90 Schools Issued Warnings
नागपुर हाई कोर्ट स्कूल बस सुरक्षा,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Transport Committee Compliance: नागपुर हाई कोर्ट ने स्कूल बसों की सुरक्षा और यातायात नियमों के अनुपालन को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट की निगरानी में चल रही एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि कुल 131 में से 90 स्कूलों ने अभी तक नियमों का पालन नहीं किया है जिसके बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने प्रतिवादी स्कूलों को एक अंतिम मौका देते हुए निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक पिछले 2 वर्षों में अपनी ट्रांसपोर्ट कमेटी (परिवहन समिति) द्वारा आयोजित बैठकों का चार्ट और छात्रों के परिवहन के लिए उपयोग की जाने वाली बसों की सूची रिकॉर्ड पर रखें।

न्यायालय ने सख्त चेतावनी दी है कि ऐसा न करने वाले प्रत्येक स्कूल को 50,000 रुपये का जुर्माना जमा करना होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल जून 2026 तक इस आदेश का सही-सही पालन कर लेते हैं तो उन पर लगाए गए जुमनि को माफ किया जा सकता है।

शिक्षा विभाग और CBSE को कार्रवाई के निर्देश

अदालत मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता फिरदौस मिर्जा ने कोर्ट को बताया कि 'महाराष्ट्र मोटर वाहन (स्कूल बस) नियम 2011 के तहत स्कूलों के लिए परिवहन समिति की बैठके आयोजित करना अनिवार्य है जिसके बाद कोर्ट ने शिक्षा उपसंचालक और CBSE को निर्देश दिया है कि जो स्कूल इस नियम और परिवहन समिति की बैठकों की शर्त का पालन नहीं करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए,

RTO और ट्रैफिक विभाग की जिम्मेदारी तय

सुनवाई के दौरान ट्रैफिक विभाग और संबंधित मनपा के बीच उचित पंत्राचार और जवाबदेही की कमी पर भी चर्चा हुई जहां कोर्ट ने कहा कि कोर्ट की निगरानी वाले मामलों में सब कुछ लिखित में होना चाहिए।

चूंकि अभी स्कूलों में छुट्टियों का समय चल रहा है, इसलिए कोर्ट ने आरटीओ को निर्देश दिया है कि वह सभी स्कूलों को एक सर्कुलर जारी करे, आरटीओं को बसों की फिटनेस जांच के लिए एक तय कार्यक्रम देना होगा, ताकि छुट्टियों के दौरान ही बसों की फिटनेस प्रक्रिया पूरी कर ली जाए और अगले साल बच्चों की सुरक्षा के लिए वहीं समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

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