बेटे-पोते ने खुद के घर से निकाला, 8 महीने से दर-दर भटक रहे थे बुजुर्ग; नागपुर बेंच ने प्रशासन को लगाई फटकार

Nagpur Senior Citizen Rights: अपने ही बेटे और पोते द्वारा घर से निकाले गए 80 वर्षीय बुजुर्ग की याचिका पर हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी को 8 जून तक अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
Evicted from their own home by their son and grandsons, elderly couple had been wandering homeless for eight months; Nagpur Bench reprimands the administration.
बुजुर्ग न्याय, हाई कोर्ट, नागपुर बेंच,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Senior Citizen Rights Property Rights: अपने ही बेटे-पोते द्वारा बेदखल किए गए 80 वर्षीय बुजुर्ग को न्याय पाने के लिए हाई कोर्ट की नागपुर बेंच का दरवाजा खटखटाना पड़ा। खुद की कमाई से बनाए घर से निकाले जाने के बाद दर-दर भटक रहे इस बुजुर्ग के मामले में हाई कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए जिलाधिकारी (डिर्सट्रक्ट मजिस्ट्रेट) को आगामी 8 जून 2026 को ही स्टे (अंतरिम रोक) हटाने की अर्जी पर सुनवाई कर फैसला सुनाने का कड़ा निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता 80 वर्षीय चिंधु महादेव मंगाटे कामठी तहसील स्थित नंदा कोराडी के निवासी हैं। उनके ही बेटे और पोते ने उनके स्व-अर्जित मकान से बाहर निकाल दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि बुजुर्ग 11 अक्टूबर 2025 से अपने ही घर से बेघर हैं।

SDO ने दिया था घर वापस दिलाने का आदेश

प्रताड़ना से परेशान होकर बुजुर्ग ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की जिसमें एनसी रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। न्याय की गुहार लगाते हुए उन्होंने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' की धारा 5 के तहत मौदा के उपविभागीय अधिकारी का रुख किया। बुजुर्ग की शिकायत पर सुनवाई करते हुए मौदा के उपविभागीय अधिकारी ने 13 अप्रैल 2026 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया। एसडीओ ने बेटे और पोते को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे मकान नंबर 159 का कब्जा वापस याचिकाकर्ता को सौंप दें।

जिलाधिकारी ने लगा दी थी रोक

अदालती आदेश के अनुसार बुजुर्ग को 12 मई 2026 को अपने घर का कब्जा मिलने वाला था लेकिन ठीक एक दिन पहले यानी 11 मई 2026 को बेटे और पोते द्वारा दायर की गई अपील पर जिलाधिकारी (अपीलीय अधिकारी) ने एसडीओ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। ऑर्डर से व्यथित होकर 80 वर्षीय चिंधु ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने कहा कि बेटे और पोते की अपील अभी भी जिलाधिकारी के समक्ष लंबित है और स्टे एप्लिकेशन पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

अदालत को सूचित किया गया कि जिलाधिकारी के समक्ष अगली सुनवाई 8 जून 2026 को निर्धारित है। इस पर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वे 8 जून 2026 को अपनी शिकायतें रखते हुए 'स्टे' हटाने के लिए अर्जी दाखिल करें। हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि ऐसी अर्जी दाखिल की जाती है तो वे सभी संबंधित पक्षों को सुनें और उसी दिन स्टे हटाने की अर्जी पर अपना फैसला सुनाएं।

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