पिंपरी-चिंचवड़ में बुजुर्गों की उपेक्षा पर होगी सख्त कार्रवाई, पुलिस आयुक्त ने जारी किए निर्देश

Pimpri Chinchwad Police News: पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नया अभियान शुरू किया है। अकेले रहने वाले बुजुर्गों की निगरानी पर विशेष जोर दिया जाएगा।
PCMC Police Warning On Tenant Verification
पिंपरी चिंचवड़ पुलिस (सौ. सोशल मीडिया )
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Pimpri Chinchwad Police Senior Citizen Safety: शहर में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय कदम उठाया है।

राज्य सरकार के मार्गदर्शन में "माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007" के तहत अब पुलिस प्रशासन अधिक सक्रियता से कार्य करेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के बुजुर्गों को एक भयमुक्त वातावरण प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि जीवन के अंतिम पड़ाव में वे अकेलेपन या असुरक्षा का शिकार न हों। पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

विस्तृत डेटाबेस और अलग रजिस्टर किया जाएगा तैयार

पुलिस की इस पहल के तहत वरिष्ठ नागरिकों का विस्तृत डेटाबेस और अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर विशेष ध्यान होगा। साथ ही, उनकी सुरक्षा हेतु घरेलू सहायकों की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन किया जाएगा।

आरडब्ल्यूए के सहयोग और नियमित पुलिस मुलाकातों से एक अभेद्य सुरक्षा चक्र बनाकर आपात स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित की जाएगी। पिंपरी-चिंचवड पुलिस द्वारा पहले से ही 'ज्येष्ठानुबंध' नामक पहल चलाई जा रही है, जिसे अब इस नए सरकारी निर्देश के साथ जोड़कर और अधिक व्यापक बना दिया गया है।

शहर के वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित वातावरण देना हमारी प्राथमिकता है। इस नए अभियान के माध्यम से हम सुनिश्चित करेंगे कि कानून का पालन हो और प्रत्येक बुजुर्ग को त्वरित सहायता मिले। हमारी टीम नियमित रूप से उनके संपर्क में रहेगी।

- विनयकुमार चौबे, पुलिस आयुक्त, पिंपरी-चिंचवड़

प्रावधान और सख्त दंड

  • पुलिस आयुक्तालय का लक्ष्य है कि शहर का प्रत्येक बुजुर्ग व्यक्ति खुद को अकेला न समझे और उसे यह विश्वास रहे कि संकट के समय खाकी वर्दी उनके साथ खड़ी है। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम के प्रावधानों को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है।
  • बच्चों या कानूनी वारिसों के लिए अपने बुजुर्गों की देखभाल करना केवल नैतिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है। यदि कोई संतान अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देती है, उनकी उपेक्षा करती है या उनके साथ दुर्व्यवहार करती है, तो पुलिस संज्ञेय अपराध दर्ज कर तत्काल कार्रवाई करेगी। इसमें दोषी पाए जाने पर तीन महीने से लेकर एक वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड का प्रावधान है।
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