
हाई कोर्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur High Court Nylon Manja Ban: हाई कोर्ट ने नायलॉन मांजा के बढ़ते खतरे और इससे होने वाली मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस जानलेवा मांजे पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं।
सुनवाई के दौरान एक वरिष्ठ नागरिक मोहम्मद आफताब अहमद खान ने तर्क दिया कि नायलॉन मांजा बेचने वालों और बच्चों के अभिभावकों पर लगाए जाने वाले जुर्माने में अंतर होना चाहिए। उन्होंने दलील दी कि यदि किसी वयस्क पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है तो वही सजा बच्चों के माता-पिता को नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि वे अपने बच्चों पर 24 घंटे निगरानी नहीं रख सकते। कोर्ट ने इस दलील पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे ‘बहुत ही अनौपचारिक दृष्टिकोण’ करार दिया।
कटाक्ष करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘हमें यह सुनकर गहरा धक्का लगा है कि कोई भी बच्चा 24 घंटे या रात में पतंग नहीं उड़ाता। वास्तविकता यह है कि दिन के समय एक निश्चित अवधि होती है जब बच्चे पतंग उड़ाते हैं और उस दौरान माता-पिता उन पर नजर रख सकते हैं।’ अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल 50,000 रुपये के जुर्माने की राशि केवल एक सुझाव के रूप में है और इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
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जनता की आपत्तियों और सुझावों को सुनने के बाद ही इस राशि पर फैसला लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि हालांकि कलेक्टरों ने समाचार पत्रों की खबरों को ही सार्वजनिक सूचना मान लिया था और अलग से नोटिस जारी करने में चूक की, फिर भी जनता को इस मामले की गंभीरता और सुनवाई की जानकारी थी।
हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि हर साल ‘संक्रांति’ त्योहार के दौरान नायलॉन मांजा के कारण कई लोग घायल होते हैं या अपनी जान गंवा देते हैं जो एक बहुत गंभीर विषय है। अदालत ने जनता से अपील की है कि वे इस जानलेवा समस्या का सही समाधान खोजने में कोर्ट की सहायता करें और केवल विरोध के लिए विरोध न करें।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एन. जाधव, सरकार की ओर से अधिवक्ता एसएम उके, मनपा की ओर से अधिवक्ता जैमिनी कासट, नगर परिषद की ओर से अधिवक्ता महेश धात्रक तथा एमपीसीबी की ओर से अधिवक्ता रवि सन्याल ने पैरवी की।






