बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप, OTT पर सुपरहिट, 85 मिनट की ये हॉरर थ्रिलर आज भी खड़े कर देगी रोंगटे

OTT Must Watch Movie: साल 2010 में फ्लॉप रही ‘कालो’ आज ओटीटी पर मस्ट वॉच हॉरर थ्रिलर बन चुकी है। 85 मिनट की यह फिल्म दिन में आतंक मचाने वाली चुड़ैल की कहानी दिखाती है।
Kaalo Horror Film 2010
कालो मूवी (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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Kaalo Horror Film 2010: हॉरर थ्रिलर फिल्मों का अपना अलग ही दर्शक वर्ग होता है। सस्पेंस, डर और अनजान खौफ का मिश्रण सिनेप्रेमियों को हमेशा आकर्षित करता है। हालांकि, इस जॉनर की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पातीं। ऐसी ही एक फिल्म है कालो, जो रिलीज के समय फ्लॉप साबित हुई, लेकिन अब ओटीटी पर धीरे-धीरे कल्ट फॉलोइंग हासिल कर चुकी है।

करीब 1 घंटा 25 मिनट की यह फिल्म बिना अनावश्यक लंबाई के सीधे कहानी पर फोकस करती है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। कम समय में यह फिल्म ऐसा सस्पेंस और डर पैदा करती है कि दर्शक अंत तक स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाते।

राजस्थान के वीरान गांव का खौफ

फिल्म की कहानी राजस्थान के एक सुनसान और श्रापित गांव के इर्द-गिर्द घूमती है। लोककथाओं के अनुसार, यह गांव एक काली शक्ति के प्रभाव से तबाह हो चुका है। लोग वहां जाने से कतराते हैं। लेकिन किस्मत से अनजान यात्रियों से भरी एक बस उसी रास्ते से गुजरती है। यहीं से शुरू होता है असली खौफ। उस इलाके में भटकती एक खतरनाक चुड़ैल बस में सवार लोगों को एक-एक कर अपना शिकार बनाती है। कहानी में सस्पेंस तब गहराता है जब केवल एक छोटी बच्ची और एक व्यक्ति जिंदा बचते हैं। दोनों मिलकर उस दुष्ट शक्ति का सामना करने की कोशिश करते हैं।

दिन के उजाले में दहशत

आमतौर पर हॉरर फिल्मों में डर रात के अंधेरे से जुड़ा होता है, लेकिन ‘कालो’ इस परंपरा को तोड़ती है। इस फिल्म में चुड़ैल दिन के उजाले में भी आतंक मचाती नजर आती है। यही अनोखा तत्व इसे बाकी हॉरर फिल्मों से अलग पहचान देता है और दर्शकों को असहज बना देता है।

फिल्म में ‘सीआईडी’ से लोकप्रिय हुए आदित्य श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई है। उनकी गंभीर और प्रभावी अदाकारी फिल्म के तनावपूर्ण माहौल को और मजबूत बनाती है।

कहां देख सकते हैं फिल्म?

अगर आप हॉरर थ्रिलर मूवी के शौकीन हैं, तो यह फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है। इसके अलावा आप इसे यट्यूब पर भी देख सकते हैं। साल 2010 में रिलीज हुई यह फिल्म भले ही सिनेमाघरों में कमाल न दिखा पाई हो, लेकिन आज के डिजिटल युग में इसे हिंदी सिनेमा की अंडररेटेड हॉरर फिल्मों में गिना जाता है। तेज रफ्तार कहानी और अलग अंदाज का डर ‘कालो’ को आपकी वॉचलिस्ट में जरूर जगह मिलनी चाहिए।

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