नागपुर कांग्रेस में ‘इस्तीफा पॉलिटिक्स’: नितिन राउत के तेवरों के आगे झुके केतन ठाकरे, पद त्यागा!
Nagpur Congress Conflict: नागपुर मनपा विवाद को लेकर नितिन राऊत की नाराजगी के बाद केतन ठाकरे का इस्तीफा। नेता प्रतिपक्ष संजय महाकालकर ने दी सफाई। जानें कांग्रेस की गुटबाजी का पूरा सच।
- Written By: प्रिया जैस
नितिन राउत और केतन ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Congress Crisis: नागपुर महानगरपालिका में स्वीकृत सदस्यों के चयन को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी और विवाद चरम पर पहुंच गया है। पूर्व मंत्री डॉ. नितिनराउत द्वारा कांग्रेस छोड़ने की धमकी देने के बाद पार्टी में हड़कंप मच गया। इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद केतन ठाकरे ने गुरुवार को अपना इस्तीफा कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष संजय महाकालकर को सौंप दिया।
पूरे मामले को लेकर पत्र-परिषद में नेता प्रतिपक्ष संजय महाकालकर ने कहा कि उन्हें पार्टी की ओर से पत्र जारी किया गया था जिसमें निर्णय लेने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। यहां तक कि जो पार्षद चुनकर आए हैं उनकी ओर से केतन ठाकरे और अतुल कोटेचा को स्वीकृत सदस्य के रूप में नामित करने की मांग का पत्र दिया गया। इसी आधार पर निर्णय लिया गया। इसमें किसी पर भी अन्याय करने का मानस नहीं रहा है।
चुनाव हारे प्रत्याशियों को नहीं लेने के निर्देश
महाकालकर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस (Congress) का सख्त आदेश था कि मनपा चुनाव में पराजित हुए उम्मीदवारों को स्वीकृत सदस्य न बनाया जाए जिस कारण सुरेश जग्याशी इस दौड़ से बाहर हो गए। डॉ. राउत के दूसरे उम्मीदवार बंडोपंत टेंभुर्णे कल दोपहर 2.45 बजे मनपा कार्यालय पहुंचे लेकिन 3 बजे की समय-सीमा होने के कारण समय के अभाव में उनका आवेदन दाखिल ही नहीं हो सका। नतीजतन, केतन ठाकरे और अतुल कोटेचा ने कांग्रेस की ओर से अपने आवेदन भर दिए। पत्र-परिषद में केतन ठाकरे, अतुल कोटेचा, विवेक निकोसे, वसीम खान, शैलेश पांडे और अभिजीत झा आदि उपस्थित थे।
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‘इसमें मेरी कोई गलती नहीं’
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे पर मनपा में नेता प्रतिपक्ष संजय महाकालकर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत सदस्य के चयन को लेकर प्रदेश कांग्रेस या डॉ. नितिन राउत की ओर से उन्हें कोई आदेश या सिफारिशी पत्र प्राप्त नहीं हुआ था।
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पश्चिम नागपुर के नगरसेवकों के विशेष आग्रह पर ही उन्होंने केतन ठाकरे का आवेदन भरा था। महाकालकर ने बताया कि आवेदन की समय सीमा समाप्त होने से मात्र 5 मिनट पहले कांग्रेस पर्यवेक्षक रंजीत कांबले का फोन आया था कि बंडोपंत टेंभुर्णे को उम्मीदवारी दी जाए लेकिन समय कम होने के कारण टेंभुर्णे अपना आवेदन नहीं भर सके।
राऊत का हमेशा बना रहेगा सम्मान : केतन ठाकरे
पूरे मामले पर केतन ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस (Congress) के पार्षदों द्वारा उनके नाम की सिफारिश किए जाने की जानकारी उन्हें दी गई जिसके बाद स्वीकृत सदस्य के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए नेता प्रतिपक्ष महाकालकर की ओर से कहा गया।
कांग्रेस का कार्यकर्ता होने के नाते अपना कर्तव्य किया है। पूर्व मंत्री नितिन राउत को पिता तुल्य करार देते हुए उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से सम्मान रहा है। भविष्य में भी बना रहेगा। स्वीकृत सदस्य को कोई मोह नहीं है, इसीलिए नेता प्रतिपक्ष को इस्तीफा सौंप दिया है। अब पार्टी जो निर्णय लेगी, उसका स्वागत है।
