महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला, 1 जुलाई 2025 की मतदाता सूची से होगा इलेक्शन

Maharashtra Nikay Chunav: बिहार में मतदाता पंजीकरण पर विवाद के चलते देशभर में विरोध की आशंका है। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची को लेकर बड़ा फैसला किया है।
maharashtra nikay chunav Voter list
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra News: बिहार में लागू हो रहे मतदाता पंजीकरण कार्यक्रम को पूरे देश में लागू करने की चर्चा थी लेकिन इससे बिहार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। अन्य जगहों पर भी इसका विरोध होने की संभावना है। दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों पर आपत्ति जताई है, इसलिए केंद्रीय चुनाव आयोग ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों के लिए 1 जुलाई 2025 की मतदाता सूची को ही स्वीकार किया जाएगा।

केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव आयोग को चुनावों के लिए 1 जुलाई 2025 की मतदाता सूची के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है, इसलिए केवल वे ही वोट दे पाएंगे जिनके नाम इस तारीख तक मतदाता सूची में हैं। निकट भविष्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में पहले चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव होंगे। ये चुनाव अक्टूबर या नवंबर में होंगे।

राज्य चुनाव आयोग ने चुनावों के लिए विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची का उपयोग करने की योजना बनाई थी लेकिन फिर राज्य चुनाव आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग से 1 जुलाई 2025 की मतदाता सूची का उपयोग करने की अनुमति मांगी। इसे मंजूरी मिलने के बाद अब इसी मतदाता सूची के आधार पर मतदान होगा।

नागपुर जिले में मतदाताओं की कुल संख्या

लिंग मतदाताओं की संख्या
पुरुष 22,93,671
महिला 23,03,358
तृतीय पंथी 314
कुल 45,97,343

केंद्र से प्रमाणित मतदाता सूची की मांग

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मतदाता सूची का काम एक निजी कंपनी को दिया गया है। संबंधित कंपनी ने राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची दे दी है लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग केंद्रीय निर्वाचन आयोग से प्रमाणित मतदाता सूची चाहता है। केंद्र द्वारा जल्द ही यह सूची राज्य को दे दी जाएगी। इसके बाद इसका उपयोग हर जिले द्वारा किया जा सकेगा।

ओबीसी आरक्षण का रास्ता भी साफ

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया। ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण को हरी झंडी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से वर्ष 2017 के अनुसार ही प्रभाग रचना के आधार पर चुनाव कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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