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स्कूल बस सुरक्षा नियमों पर हाई कोर्ट सख्त, अधिकारी कर रहे बचने का उपाय, सरकार से मांगा जवाब
High Court: स्कूल बस के पिछले पहिए में आकर बच्चे की हुई दर्दनाक मृत्यु को लेकर छपी खबर पर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया था। इस याचिका पर हाई कोर्ट की ओर से वर्ष 2012 के बाद से लगातार आदेश दिए।
- Written By: प्रिया जैस

हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Nagpur News: स्कूल बस के पिछले पहिए में आकर बच्चे की हुई दर्दनाक मृत्यु को लेकर छपी खबर पर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया था। जनहित के रूप में स्वीकृत की गई इस याचिका पर हाई कोर्ट की ओर से वर्ष 2012 के बाद से लगातार आदेश-निर्देश दिए गए। हाई कोर्ट द्वारा लगातार दिए जा रहे आदेशों के बावजूद प्रशासन द्वारा केवल खानापूर्ति होने पर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट ने स्कूल बस सुरक्षा नियमों पर सख्ती दिखाई।
स्कूली छात्रों की सुरक्षा से जुड़े एक अहम मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। यहां तक कि न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने स्कूल बसों और वैन से संबंधित नियमों में प्रस्तावित संशोधनों की वर्तमान स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है।
स्कूलों को जारी हो रहा परिपत्रक
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की पैरवी कर रहे अधि। ठाकरे ने कहा कि शिक्षण विभाग की ओर से सभी स्कूलों को परिपत्रक जारी किया जा रहा है जिसमें स्कूल कमेटी स्थापित करने के निर्देश दिए जा रहे है। इस संदर्भ में कड़ी नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि इस तरह से परिपत्र जारी करना केवल जिम्मेदारियों को दूसरों पर थोपने जैसा है।
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यदि कोई घटना होती है तो वरिष्ठ अधिकारी नियमों का हवाला देकर इस तरह के निर्देश पहले ही जारी किए जाने की वकालत करते है। सुनवाई के दौरान अदालत मित्र फिरदौस मिर्जा ने कहा कि इसके पहले ही स्कूलों में स्कूल और पालकों की समिति बनाने के निर्देश जारी हो चूके है। यहां तक कि परिवहन समिति भी बनाई गई है। अब यह तीसरी कमेटी बनाने की कवायद हो रही है।
कमेटी नहीं जिम्मेदारी की जरूरत
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस तरह से केवल कमेटी की क्या जरूरत है। सर्वप्रथम नियमों का पालन हो, इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की है। इसे गंभीरता से निभाने की जरूरत है। हाल ही में कोराडी रोड पर हुए हादसे को फिर से याद कर कोर्ट ने कहा कि मृतक बच्ची के माता-पिता ने चालक को लेकर 2 बार स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी किंतु कोई उपाय नहीं हुए।
ऐसी स्थिति में किसे जिम्मेदार माना जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत मित्र वरिष्ठ अधि। मिर्जा ने कहा कि इसके पूर्व कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए थे जिनके अनुसार स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे आदि लगाने की शर्तें रखी गई थीं। यहां तक कि बच्चों को लेने के लिए इन स्कूल बसों के लिए स्टॉप भी चिह्नांकित मनपा की ओर से किए गए थे।
108 की तरह जारी हो नंबर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से आपात स्थिति के लिए 108 नंबर जारी हुआ है। उसी तरह से यदि किसी स्कूल बस या वैन से संबंधित शिकायत हो तो उसके लिए 3 अंकों का नंबर जारी किया जाना चाहिए। अधि। मिर्जा ने कहा कि सर्वाधिक परेशानी स्कूल वैन से है जिसमें किसी तरह के फिटनेस या नियमों का पालन नहीं होता है।
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उन्होंने 18 जुलाई 2025 की एक अधिसूचना की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। इस अधिसूचना में ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन (स्कूली बसों के लिए विनियम) (प्रथम संशोधन) नियम, 2025’ का मसौदा जारी किया गया था जिसका उद्देश्य ‘स्कूल बस’ और ‘स्कूल वैन’ की परिभाषाओं में संशोधन करना है।
कोर्ट ने मांगा सुझाव
- न्यायालय ने न्याय मित्र से अपेक्षा की है कि वे उच्च शिक्षा उप निदेशक, नागपुर द्वारा स्कूल बसों और वैन के लिए प्रस्तावित निर्देशों/मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का अध्ययन करें और अगली सुनवाई पर अपने सुझाव दें।
- इसके अतिरिक्त अदालत ने नगर निगम के वकील को भी निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख पर स्कूल बसों और वैन के लिए निगम द्वारा तय किए गए स्टॉपेज (ठहराव) के बारे में बयान दे।
High court strict on school bus safety rules officials evasive measures
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