नागपुर ड्रेनेज लाइन विवाद में हाई कोर्ट का बड़ा कदम; मौके के मुआयने के लिए नियुक्त किया कोर्ट कमिश्नर
Nagpur Storm Water Drain: स्टॉर्म वाटर ड्रेन विवाद में नागपुर हाई कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। कमिश्नर मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके आधार पर मामले में आगे की सुनवाई होगी।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर हाई कोर्ट, स्टॉर्म वाटर ड्रेन, चिटनवीस ट्रस्ट, मनपा विवाद,(फोटो.सोशल मीडिया)
Nagpur High Court Storm Water Drain: गंगाधरराव चिटनवीस मेमोरियल मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट और नागपुर महानगरपालिका के बीच चल रहे ‘स्टॉर्म वाटर ड्रेन’ (बरसाती पानी की निकासी) के विवाद में हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया। मामले की तकनीकी बारीकियों को देखते हुए न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने एक कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की है जो मौके का मुआयना कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
गंगाधरराव चिटनवीस मेमोरियल मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट की जमीन पर बने स्टॉर्म वाटर ड्रेन को म्हाडा के समृद्धि संकुल कॉम्प्लेक्स में स्थित महानगरपालिका के स्टॉर्म वाटर ड्रेन से जोड़ने के लिए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता ट्रस्ट ने अदालत से मांग की है कि मनपा को इन दोनों ड्रेनेज लाइनों को तुरंत जोड़ने का निर्देश दिया जाए।
आर्किटेक्ट प्रद्युम्न सहस्रभोजने बने कमिश्नर
सुनवाई के दौरान इस निकासी व्यवस्था को जोड़ने की व्यावहारिकता को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अदालत में कई तर्क और प्रति-तर्क रखे गए। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि इस समस्या के समाधान के लिए पक्षों द्वारा कुछ अन्य विकल्प भी सुझाए गए हैं।
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अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चूंकि इस मामले में ड्रेनेज और निर्माण से जुड़े कई तकनीकी पहलू शामिल हैं, इसलिए जमीनी हकीकत और प्रस्तावित योजना पर रिपोर्ट देने के लिए एक विशेषज्ञ का होना आवश्यक है। सभी पक्षों की सहमति के बाद अदालत ने आर्किटेक्ट प्रद्युम्न सहस्त्रभोजने को इस मामले में कमिश्नर नियुक्त किया है।
विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश
हाई कोर्ट ने कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह विवादित स्थल का दौरा करें और सभी संबंधित पक्षों महानगरपालिका, म्हाडा और याचिकाकर्ता (ट्रस्ट) के दावों को विस्तार से समझे। कमिश्नर को मुख्य रूप से यह जांच करनी होगी कि पक्षों द्वारा सुझाए गए विकल्पों में से कौनसा कदम सबसे अधिक व्यावहारिक है और जिसे सरलता से लागू किया जा सकता है।
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अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे कमिश्नर के साथ विचार-विमर्श करके और उनकी सुविधानुसार स्थल निरीक्षण की तारीख तय करें, कमिश्नर को अपनी जांच के बाद 4 सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी, याचिकाकर्ता की ओर से अधि, एएस मनोहर, नागपुर महानगरपालिका की ओर से अधि, जेमिनी कासट और म्हाडा की ओर से अधि। पीएस तिड़के ने पैरवी की।
