नवी मुंबई में बड़ा फैसला: घनसोली सिम्प्लेक्स सोसायटियों का क्लस्टर योजना से होगा पुनर्विकास; अधिसूचना जारी
Ghansoli Simplex Society: नवी मुंबई की घनसोली सिम्प्लेक्स सोसायटी का पुनर्विकास क्लस्टर योजना के तहत होगा। नगर विकास विभाग की अधिसूचना से माथाड़ी कामगारों के 3264 परिवारों को बड़ी राहत।
- Written By: रूपम सिंह
सिम्प्लेक्स सोसायटियों (प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Ghansoli Cluster Redevelopment: घनसोली स्थित सिम्प्लेक्स सोसायटियों के नागरिकों को नाराजगी आखिरकार दूर हो गई है। नगर विकास विभाग ने इन सोसायटियों का पुनर्विकास क्लस्टर योजना के तहत करने का निर्णय लिया है। नगर विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। पता हो कि सिम्प्लेक्स सोसायटी के पुनर्विकास के लिए नवी मुंबई शिवसेना जिला प्रमुख किशोर पाटकर लंबे समय से प्रयास कर रहे थे।
क्लस्टर योजना के तहत पुनर्विकास की अधिसूचना जारी होने के बाद यहां रहने वाले हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है। पता हो कि नवी मुंबई में यह पहली हाउसिंग सोसायटी है, जिसका पुनर्विकास क्लस्टर योजना के तहत करने की अनुमति दी गई है। यहां रहने वाले लोग काफी समय से पुनर्विकास करने की मांग कर रहे थे।
माथाड़ी कामगारों के लिए बनी थीं इमारतें
सिडको द्वारा 2004 में निर्मित इन इमारतों में मुख्यतः निम्न आय वर्ग के नागरिक रहते हैं। इन घरों का निर्माण माथाड़ी कामगारों के लिए किया गया था, हालांकि, पिछले बीस वर्षों में, इमारतों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। मानसून के दौरान दीवारों से रिसाव, छत के प्लास्टर का गिरना, घरों में सीलन, अंधेरा और सीवेज चैनलों के खराब होने जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
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परिणामस्वरूप, 3264 परिवारों में से लगभग 1200 से 1300 परिवार इमारतों के गिरने के डर से इमारतें छोड़ चुके थे, और शेष निवासी अपनी जान हथेली पर रखकर इन जर्जर घरों में रहने के लिए विवश थे। आईआईटी खड़गपुर, वीजेटीआई और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट किया गया था। इन सभी रिपोटों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि ये इमारतें मानव निवास के लिए अनुपयुक्त और बेहद खतरनाक हैं।
मानसून में बढ़ जाती थीं मुश्किलें
निवासियों के अनुसार, बरसात के मुंबई मौसम में दीवारों से पानी रिसना, छत का प्लास्टर गिरना, घरों में सीलन, अंधेरा और सीवेज व्यवस्था की खराब स्थिति जैसी समस्याएं आम हो गई थीं। हालात इतने खराब हो गए थे कि 3,264 परिवारों में से करीब 1,200 से 1,300 परिवार इमारतों की जर्जर स्थिति के कारण अपने घर छोड़ चुके थे, जबकि बाकी लोग जोखिम के बीच वहीं रहने को मजबूर थे।
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विशेषज्ञ संस्थानों ने बताया था खतरनाक
इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट आईआईटी खड़गपुर, वीजेटीआई और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा किया गया था। सभी रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ये इमारतें मानव निवास के लिए अनुपयुक्त और अत्यंत खतरनाक हो चुकी हैं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर पुनर्विकास की मांग लगातार उठाई जा रही थी।
सुरक्षित और आधुनिक आवास की उम्मीद
क्लस्टर योजना के तहत पुनर्विकास की अधिसूचना जारी होने से अब हजारों परिवारों को सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से युक्त आवास मिलने का रास्ता साफ हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि परियोजना का काम जल्द शुरू होगा और वर्षों से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान मिलेगा।
