वेतन समानता के नहीं सुलझे दावे, सरकारी वकीलों के कार्यालयों में कर्मचारियों को लेकर खुलासा

High Court: हाई कोर्ट ने राज्य के तमाम हाई कोर्ट में सरकारी वकीलों के कार्यालयों में कर्मचारियों की भर्ती को लेकर आदेश जारी किया था। लेकिन वेतन समानता के दावे अभी भी अनसुलझे है।
High Court: हाई कोर्ट ने राज्य के तमाम हाई कोर्ट में सरकारी वकीलों के कार्यालयों में कर्मचारियों की भर्ती को लेकर आदेश जारी किया था। लेकिन वेतन समानता के दावे अभी भी अनसुलझे है।
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Updated on

Nagpur News: स्वामिनी महिला बचत गट ने भले ही बचत खाते में 10,000 रुपए शेष राशि रखने और टेंडर कार्यवाही की शर्तों को लेकर याचिका दायर की हो किंतु इस पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों के कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी के चलते काम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का मामला उजागर हुआ।

इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य के तमाम हाई कोर्ट में सरकारी वकीलों के कार्यालयों में कर्मचारियों की भर्ती को लेकर आदेश जारी किया था। अब राज्य सरकार की पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी प्रस्ताव पहले ही जारी किए गए हैं। यही कारण है कि वेतन समानता के दावे को छोड़कर अन्य सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।

राज्य सरकार का वित्त विभाग धीमा क्यों?

जिसके बाद हाई कोर्ट ने वेतन समानता के दावों पर सुनवाई के लिए मामला स्थगित कर दिया। गत समय कोर्ट ने आदेश में कहा कि जब 27 जून 2025 की अधिसूचना में हाई कोर्ट के सरकारी वकील कार्यालय में मंजूर पदों को उजागर किया जा चुका है तो राज्य सरकार का वित्त विभाग पदों को मंजूर करने में इतना धीमा क्यों है।

2 माह में उपसमिति की बैठक तक नहीं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे वकील ने 14 मई 2025 को सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर कोर्ट का ध्यानाकर्षित किया जिसमें बताया गया कि राज्य सरकार ने सरकारी वकीलों के कार्यालयों में कर्मचारियों को वेतन पैकेज के संबंध में की जाने वाली सिफारिशों के मामले में एक उपसमिति गठित की है।

हालांकि, उपसमिति तो गठित की गई है किंतु राज्य ने इस मामले में कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाया है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उपसमिति ने इस मामले में अब तक एक बैठक तक नहीं की है। इस संदर्भ में उपसमिति के अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा दायर किए जाने वाले शपथपत्र में जानकारी उजागर करने का आश्वासन सरकारी वकील द्वारा दिया गया।

स्टेनोग्राफर की भारी कमी

गत समय ही कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया था कि कुल 64 विधि अधिकारियों के मुकाबले, सरकारी वकील और पीपी के कार्यालय में केवल 10 स्टेनोग्राफर उपलब्ध है। परिणामस्वरूप यदि अनुपात को देखा जाए तो लगभग 7 विधि अधिकारियों के लिए एक स्टेनोग्राफर की आवश्यकता होती है। स्टेनोग्राफर के पदों की संख्या में यह कमी न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध मामलों को स्थगित रखने का कारण बन रही है।

विभिन्न सरकारी विभागों और कार्यालयों, विशेष रूप से मंत्रालय को जारी किए गए पत्र के बावजूद समय पर निर्देश जारी नहीं किए जाते हैं, इसलिए औसतन 3 स्थगन केवल सरकारी कार्यालयों और मंत्रालय से निर्देश मांगने या मंगवाने के लिए मांगे जाते हैं।

Navbharat Live
navbharatlive.com