कपास बीज की बिक्री पर 1 जून तक रोक, भीड़ और देरी से बचने के लिए तेलंगाना-आंध्र प्रदेश का रुख कर रहे किसान

Chandrapur Cotton Farming: गुलाबी सुंडी के खतरे के कारण महाराष्ट्र में 1 जून के बाद कपास बीज मिलेंगे। स्थानीय भीड़ और देरी से बचने के लिए चंद्रपुर के किसान तेलंगाना और आंध्रप्रदेश से बीज ला रहे हैं।
To avoid pink bollworm, Maharashtra banned cotton seed sales until June 1. Seeking early sowing, Chandrapur farmers are procuring seeds from Telangana and Andhra Pradesh.
कपास, खरीफ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrapur Cotton Kharif Season 2026: राज्य सरकार ने गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के प्रकोप को रोकने के लिए 1 जून के बाद ही कपास बीज बिक्री के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद चंद्रपुर जिले के कपास उत्पादक किसान मई महीने से ही बीज की तलाश में तेलंगाना और आंध्रप्रदेश का रुख कर रहे हैं। महाराष्ट्र में बिक्री पर लगी समय-सीमा और स्थानीय कृषि केंद्रों पर होने वाली भीड़ से बचने के लिए किसान सीमापार जाकर बीज खरीद रहे हैं।

जिले में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो गई हैं और किसान खाद, बीज तथा कीटनाशकों की खरीद के लिए कृषि केंद्रों पर पहुंचने लगे हैं। चंद्रपुर जिला पारंपरिक रूप से धान उत्पादक क्षेत्र माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कपास को अच्छे दाम मिलने से इसकी खेती का रकबा लगातार बढ़ा है। इस वर्ष कृषि विभाग ने जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बुआई का लक्ष्य रखा है।

मई माह में ही कर रहे बुआई की तैयारी

राजुरा, कोरपना, जिवती, पोंभुर्णा, - गोंडपिंपरी, भद्रावती, वरोरा और चिमूर - तहसीलों में बड़े पैमाने पर कपास की खेती - की जाती है। सिंचाई सुविधा वाले कई - किसान मई महीने में ही बुआई की तैयारी - पूरी कर लेते हैं। लेकिन राज्य में जून से पहले कपास बीज बिक्री की अनुमति नहीं - होने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है।

चंद्रपुर जिले के बड़े विक्रेताओं के पास मई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में बीज का स्टॉक पहुंच जाता है, लेकिन अधिकृत बिक्री जून से ही शुरू होती है। इसके बाद छोटे कृषि केंद्रों को बीज उपलब्ध कराया जाता है। इससे कई स्थानों पर किसानों की लंबी - कतारें लग जाती हैं। इसी परेशानी से बचने के लिए किसान तेलंगाना और आंध्रप्रदेश से

बीज ला रहे हैं।

बीजों की गुणवत्ता पर सवाल

बाहरी राज्यों से लाए जा रहे कुछ बीजों की अंकुरण क्षमता कम होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई बार बीज उगते ही नहीं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद समय पर बुआई के लिए किसान जोखिम उठाकर सीमापार जा रहे हैं। जिले में करीब 1200 कृषि केंद्र हैं। केंद्र संचालकों ने शासन से मई महीने में ही कपास बीज बिक्री की अनुमति देने की मांग की है। वहीं कृषि विभाग ने किसानों से अनुशंसित अवधि में ही बोआई करने की अपील की है।

गुलाबी सुंडी के खतरे से बचने के लिए प्रतिबंध

कृषि विभाग के अनुसार मई महीने में बोई गई कपास फसल पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप अधिक होने की आशंका रहती है। इसी कारण किसानों को जून के बाद ही बुआई करने के लिए बीज बिक्री पर समय-सीमा लागू की गई है। समय से पहले बुआई होने पर उत्पादन लागत बढ़ने के साथ कीट नियंत्रण के लिए अतिरिक्त छिड़काव भी करना पड़ता है।

"महाराष्ट्र में कृषि आयुक्तालय ने गुलाबी सुंडी का खतरा टालने के लिए 1 जून के बाद ही कपास बीज बिक्री के आदेश दिए है। किसानों को भी जून महीने के बाद ही कपास की बोआई करनी चाहिए।"

- शंकरराव तोटावार, जिला अधीक्षक कृषि

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