

Air India News: एयर इंडिया का एक विमान शुक्रवार को हादसे का शिकार होने से बच गया। नागपुर से दिल्ली जा रहे विमान के टेकऑफ करने के कुछ ही देर बाद उससे पक्षी टकरा गया। पायलट ने विमान के इंजन में कंपन होता देख यू-टर्न लेकर वापस नागपुर में इमरजेंसी लैंडिंग करने का फैसला किया। विमान को लगे झटके से सभी यात्री घबरा गये थे। विमान में 170 यात्री सवार थे। किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।
नागपुर हवाई अड्डे पर जानवरों और पक्षियों का आना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी रनवे पर सुअर, हिरण और पक्षी देखे गए हैं। शुक्रवार की घटना ने हवाई अड्डे पर ऐसी पुरानी घटनाओं को उजागर कर दिया। शुक्रवार को एयर इंडिया के नागपुर-दिल्ली विमान क्रमांक 466 ने शाम 6.38 बजे उड़ान भरी। उड़ान भरने के कुछ देर बाद पायलट ने देखा कि विमान का इंजन कंपन कर रहा है। पायलट को संदेह हुआ कि कोई पक्षी विमान से टकरा गया है। पायलट ने विमान को वापस नागपुर हवाई अड्डे पर लाने का फैसला कर एटीसी से संपर्क किया। विमान हिंगना की ओर से होते हुए सुराबर्डी, फेटरी, कलमेश्वर और सावनेर तक पहुंच चुका था। वहां से विमान पाटन सवांगी, कोराडी और कामठी होते हुए नागपुर हवाई अड्डे पर उतरा। लैंडिंग के तुरंत बाद ही इंजीनियर्स विमान की जांच में लग गये। इस दौरान करीब एक घंटे तक यात्री विमान में ही बैठे रहे।
सूत्रों के अनुसार विमान में बैठे-बैठे परेशान यात्रियों ने जब रोष जताया, तो उन्हें विमान से बाहर उतारा गया। दूसरे विमान से भेजने की व्यवस्था करने के बजाय एयरलाइंस द्वारा यात्रियों को टिकट का पूरा पैसा रिफंड कर दिया गया। हवाई अड्डे पर हुई इस घटना के संबंध में जब एमआईएल के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि नागपुर से दिल्ली जा रहा विमान तकनीकी कारणों से वापस लौट आया था।
इस समय दिवाली चल रही है और हर जगह पटाखे फोड़े जा रहे हैं। इसलिए हवाई अड्डे और आसपास के इलाकों में पक्षियों के उड़ने की संभावना बहुत कम है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इंजन में महसूस हुए कंपन के पीछे कोई तकनीकी कारण अवश्य होगा। 2 सितंबर को इंडिगो एयरलाइंस की नागपुर-कोलकाता उड़ान से एक पक्षी टकरा गया था। 2 महीने के भीतर यह इस तरह की दूसरी घटना है।
एयरपोर्ट के पास के इलाके से लगी हुईं मटन की कई दुकानें हैं, जिससे एयरपोर्ट के पास पक्षियों का जमावड़ा लगा रहता है। विमान से कई बार पक्षियों के टकराने की घटना होने के बावजूद प्रशासन द्वारा मटन की दुकानों को हटाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। प्रशासन का ध्यान नहीं होने से यहां पर नई-नई दुकानें खुलती जा रही हैं।