
Uddhav Thackeray Demand:शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे (सोर्सः सोशल मीडिया)
Unopposed Seats Maharashtra: शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मांग की कि महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनाव के तहत जिन वार्डों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, वहां चुनाव रद्द किए जाएं और पूरी चुनावी प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्विरोध चुने गए अधिकांश उम्मीदवार सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन से जुड़े दलों के हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य में नगर निकाय चुनाव 15 जनवरी को होने हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे के साथ संयुक्त रूप से संवाददाताओं से बात करते हुए उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि देश में हालात ऐसे बन गए हैं, “मानो लोकतंत्र पर भीड़तंत्र ने कब्जा कर लिया हो।”इस अवसर पर दोनों चचेरे भाइयों ने आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए अपने गठबंधन का संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किया।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए और मुंबई सहित राज्य के अन्य शहरों के महापौर मराठी ही होंगे। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि जून 2022 में उनकी सरकार गिरने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद बीएमसी की संपत्ति ठेकेदारों पर लुटाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि यदि बीएमसी का वार्षिक बजट 15 हजार करोड़ रुपये है, तो विभिन्न कार्यों के लिए ठेकेदारों को अग्रिम राशि के रूप में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये देने पड़ते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे “तीन लाख करोड़ रुपये का घोटाला” करार देते हुए आरोप लगाया कि रिश्वत की यह राशि नगर निकाय चुनावों में खर्च की जा रही है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों ने निर्विरोध 68 सीटों पर जीत दर्ज की है।
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि “वोट चोरी के बाद अब सत्तारूढ़ दल उम्मीदवार भी चुरा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “अगर राज्य निर्वाचन आयोग में साहस है, तो उसे उन सभी वार्डों में चुनाव रद्द कर देने चाहिए, जहां उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, और वहां चुनावी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी चाहिए।”उन्होंने यह भी कहा कि निर्विरोध चुनाव मतदाताओं, विशेष रूप से ‘जेनरेशन-जेड’, से उनके मताधिकार का अवसर छीनने जैसा है।
सत्तारूढ़ गठबंधन को चेतावनी देते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और भाजपा एक गलत परंपरा स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके उत्तराधिकारी और अधिक परिष्कृत तरीके से ऐसे हथकंडे अपनाएं, तो सत्तारूढ़ दल को शिकायत नहीं करनी चाहिए।
राज ठाकरे ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्थानीय निकाय चुनाव में जब सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, तो भाजपा उच्चतम न्यायालय गई थी। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा का रुख स्पष्ट करने की मांग की।
वहीं भाजपा ने निर्विरोध जीत के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चंद्रपुर में एक रोड शो के दौरान कहा कि विपक्ष अदालत जाए या न जाए, जनता का जनादेश मान्य रहेगा।
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फडणवीस ने निर्दलीय और मुस्लिम उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत पर विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा “वे चाहे अदालत जाएं, लेकिन जनता की अदालत ने हमें चुना है। भले ही वे अदालत में जाएं, जनता का जनादेश सर्वोपरि रहेगा।”मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष अपनी हार स्पष्ट रूप से देख रहा है और अब बहाने तलाश रहा है।
उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर भी निशाना साधते हुए उन पर नगर निकाय चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, नामांकन प्रक्रिया में हस्तक्षेप और चुनाव से जुड़े सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के आरोप लगाए।
उन्होंने मांग की कि विधानसभा अध्यक्ष को तत्काल निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाए। हालांकि, दक्षिण मुंबई के कोलाबा से भाजपा विधायक ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।






