Thane Borivali Twin Tunnel Project Update Travel Time 15 Minutes May 2028
ठाणे-बोरीवली का सफर अब सिर्फ 15 मिनट में! SGNP टनल प्रोजेक्ट पर आया बड़ा अपडेट, जानें कब तक होगा काम पूरा
Thane-Borivali Twin Tunnel Project: मुंबई में ट्रैफिक की समस्या अब इतिहास बनने वाली है। संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे बन रही 11.84 किमी लंबी जुड़वां सुरंगठाणे और बोरीवली के बीच की दूरी को कम करेगी।
Mumbai Infrastructure Projects: मायानगरी मुंबई की ट्रैफिक समस्या से जूझ रहे लाखों यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक ‘ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल प्रोजेक्ट’ अब तेजी से धरातल पर उतर रहा है। संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) के नीचे बनने वाली यह सुरंग न केवल यात्रा का समय घटाएगी, बल्कि प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
Thane-Borivali Twin Tunnel Project क्या है?
वर्तमान में ठाणे से बोरीवली जाने के लिए घोडबंदर रोड या वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे का सहारा लेना पड़ता है। भारी ट्रैफिक के कारण इस 23 किलोमीटर की दूरी को तय करने में 1 से 1.5 घंटे का समय लगता है। लेकिन, 11.8 किलोमीटर लंबी यह ट्विन टनल इस दूरी को घटाकर मात्र 12 किलोमीटर कर देगी। सबसे बड़ी बात यह है कि टनल शुरू होने के बाद यात्री यह सफर महज 15 मिनट में पूरा कर सकेंगे।
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Mumbai Metropolitan Region will never move the same way again.For decades, the only direct route between Thane and Borivali would take 60 to 90 minutes. That will soon change.
Tunnelling is set to commence on India’s longest urban road tunnel, the 11.84 km Thane–Borivali Twin… pic.twitter.com/k5PfxYrawo— MMRDA (@MMRDAOfficial) April 2, 2026
‘नायक’ और ‘अर्जुन’ बदलेंगे मुंबई की रफ्तार
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का उपयोग किया जा रहा है। भारत की सबसे बड़ी सिंगल-शील्ड हार्ड रॉक TBM, जिसका नाम ‘नायक’ रखा गया है, सुरंग की खुदाई के लिए तैयार है। इसके साथ ही, दूसरी मशीन ‘अर्जुन’ को भी जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। ये मशीनें संजय गांधी नेशनल पार्क के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन के नीचे रास्ता तैयार करेंगी।
मई 2028 की डेडलाइन और लेटेस्ट स्टेटस
MMRDA के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को मई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाल ही में टनल बोरिंग मशीनों (TBM) की असेंबली और लॉन्चिंग पैड का काम तेजी से शुरू हुआ है। लगभग 18,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए वन विभाग से आवश्यक भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
पर्यावरण का रखा गया है खास ध्यान
चूंकि यह सुरंग संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे से गुजरेगी, इसलिए पर्यावरण प्रेमियों की चिंताएं वाजिब थीं। हालांकि, MMRDA ने स्पष्ट किया है कि टनल जमीन से करीब 23 मीटर नीचे होगी, जिससे नेशनल पार्क के वन्यजीवों और वनस्पतियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। साथ ही, इस टनल के बनने से हर साल लगभग 1.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, क्योंकि वाहनों को अब लंबे और ट्रैफिक वाले रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा।