महाराष्ट्र के जल जीवन मिशन पर CAG रिपोर्ट, नल कनेक्शन, वित्तीय प्रबंधन और क्रियान्वयन पर उठे सवाल

Maharashtra Jal Jeevan Mission: सीएजी ने महाराष्ट्र में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और जल गुणवत्ता जांच में गंभीर खामियां बताईं। नल कनेक्शन और कवरेज के दावों पर भी सवाल उठाए।
CAG Report On Maharashtra Jal Jeevan Mission Financial Irregularities Audit
जल जीवन मिशन पर सीएजी की रिपोर्ट (सोर्स: AI)
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CAG Report On Maharashtra Jal Jeevan Mission: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने महाराष्ट्र में केंद्र की महत्वाकांक्षी ग्रामीण पेयजल योजना जल जीवन मिशन की योजना, वित्तीय प्रबंधन और क्रियान्वयन में व्यापक खामियां पाई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गांव, जिला और राज्य स्तर पर व्यवस्थागत कमियों के चलते मिशन का क्रियान्वयन प्रभावित हुआ है, जिससे यह शीर्षक पूरी तरह सटीक साबित होता है।

सीएजी (कैग) ने पाया कि जांचे गए किसी भी जिले में अनिवार्य आधारभूत सर्वेक्षण नहीं हुआ। चुने गए 24 गांवों में से 13 की ग्राम कार्य योजनाएं ग्राम पंचायतों की मंजूरी के बिना ही तैयार कर दी गईं। जिला कार्य योजनाओं में एफएचटीसी के तिमाही व वार्षिक लक्ष्य, वित्तीय योजना और जल सुरक्षा जैसे जरूरी बिंदु शामिल नहीं थे। राज्य स्तर पर व्यापक कार्य योजना का अभाव भी संसाधन प्रबंधन को प्रभावित करता रहा।

कनेक्शन दावों पर संदेह

ऑडिट में सामने आया कि राज्य ने 27.74 लाख निजी नल कनेक्शनों को भी मिशन की उपलब्धि में गिना, जबकि ये कनेक्शन मिशन के तहत नहीं दिए गए थे। मार्च 2024 तक राज्य ने 85.15 प्रतिशत कवरेज बताया था, लेकिन निजी कनेक्शन हटाने पर दिसंबर 2024 तक वास्तविक कवरेज घटकर करीब 69 प्रतिशत रह गई। चुने गए छह जिलों में यह आंकड़ा 82.72 से घटकर 44.29 प्रतिशत रह गया।

धीमा क्रियान्वयन और वित्तीय अनियमितता

2019 से 2024 के बीच शुरू की गईं 51,560 जलापूर्ति योजनाओं में से केवल 24.64 प्रतिशत ही पूरी हो सकीं. भूमि उपलब्धता, वन मंजूरी और प्रशासनिक अड़चनों को इसकी वजह बताया गया। वित्तीय मोर्चे पर 59,740.99 करोड़ रुपए में से मात्र 46.30 प्रतिशत राशि ही जारी की गई। मिशन निधि से गैर-संबंधित सॉफ्टवेयर खरीद और आवासीय निर्माण जैसे अनुचित खर्च भी दर्ज किए गए।

जल गुणवत्ता जांच में लापरवाही

पांच जिलों में जल परीक्षण निर्धारित स्तर से काफी कम पाया गया। अहिल्यानगर में 301 और जलगांव में 577 नमूनों की जांच ही नहीं हुई। राज्य की अपनी जल गुणवत्ता प्रयोगशाला अब तक स्थापित नहीं हो पाई है।

कैग की सिफारिशें

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मजबूत कार्य योजना, निजी कनेक्शनों को नियमित करने, वित्तीय नियंत्रण मजबूत करने और जल गुणवत्ता निगरानी सुधारने की सिफारिश की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 27.74 लाख निजी नल कनेक्शनों को जेजेएम उपलब्धि में शामिल करने पर सीएजी ने सवाल उठाए।
  • निजी कनेक्शन हटाने पर राज्य का वास्तविक एफएचटीसी कवरेज लगभग 69 प्रतिशत रह गया।
  • 51,560 में से केवल 12,703 जलापूर्ति योजनाएं पूरी हो सकीं।
  • परियोजनाओं की लागत संशोधन से 9,608.87 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा।
  • 'हर घर जल' प्रमाणन, जल गुणवत्ता परीक्षण और वित्तीय प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
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